डॉ धर्मेंद्र कुमार : जिन्हें हम राम समझे थे ,राम के भरोसे निकले
भारतीय संदर्भ में उपरोक्त पंक्ति सार्थक सिद्ध होती है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी द्वारा राम राज्य की स्थापना का स्वप्न दिखाकर 15 लाख, मेगा सिटी, हवाई जहाज में बिठाना, जैसे स्वरचित स्वप्न दिखाकर मीडिया द्वारा स्व प्रचार करवाया तब नागरिकों ने खुशी खुशी सत्ता कांग्रेस से छीन कर भारतीय जनता पार्टी को पकड़ा दी l क्योंकि कांग्रेस घोटालेबाज पार्टी थी जिसने तमाम काला धन विदेशों में जमा कर दिया था उस काले धन को वापस लाने हेतु अन्ना हजारे और रामदेव जैसे लोगों ने रामलीला मैदान में आंदोलन किया तब देश के वीर ,बहादुर ,बहुमुखी ,कर्तव्य परायण ,यशस्वी ,तेजस्वी व्यक्ति ने खुद को चौकीदार बताते हुए कहा कि हम काला धन ला कर प्रत्येक नागरिक के खातों में 15 लाख देंगे बस फिर क्या लोगों ने कांग्रेस को चारों कोनों चित कर दिया और चौकीदार साहब का राजतिलक हुआ उन्होंने घोषणा की कि जनधन खाते खुलवाएं पैसा भेज रहा हूं l अब पैसा नहीं आया तो चौकीदार साहब का कोई दोष नहीं है l मेगा सिटी नहीं बने, बुलेट ट्रेन नहीं चली तो जरूर तकनीकी खराबी है l चौकीदार दोषी नहीं माना जा सकता l विशेषज्ञों ने सलाह दी नोट बंदी से काला -काला निकलेगा वह भी बेकार साबित हुआ l काला सफेद कुछ मालूम ही नहीं हुआ फिर विशेषज्ञों की राय अनुसार जीएसटी से, एफडीआई से काला नहीं होगा किंतु यह प्रयास भी निरर्थक साबित हुआ l और बैंक दिवालिया हो गए, सरकारी विभागों का निजीकरण हो गया ,दो करोड़ को रोजगार तो नहीं मिला किंतु करोड़ों रोजगार से हाथ धो बैठे l युवा रोजगार की लाइन में खड़े -खड़े अब सुस्ताने लगे l लगता है –
दिल के अरमां आंसुओं में बह गए…….
प्रत्येक सरकार हर विभाग के विशेषज्ञों को अपने हिसाब से पद पर स्थापित करती है किंतु वर्तमान कोरोना काल में प्रत्येक विभाग के विशेषज्ञ जिन पर बजट का बहुत बड़ा हिस्सा उनके ऐसो आराम पर खर्च किया जाता है अर्थ जगत ,भंडार ग्रह, चिकित्सा ,रक्षा ,नियोजन ,गरीबी उन्मूलन , मजदूर श्रमिक योजनाओं के विशेषज्ञ क्या कर रहे हैं ? जब हर तरफ त्राहिमाम मचा है l किसी भी विशेषज्ञ की विशेषज्ञता काम नहीं आई इसका मतलब था कि किसी भी विशेषज्ञ का धरातल पर कार्य शून्य था l और किताबी तथा फाइल ज्ञान कार्यालय के हिसाब से पूर्ण था l किसी भी प्रकार के आंकड़े फर्जी थे l आज करोड़ों लोग पैदल चले और मृत्यु को पा गए l चिकित्सा सुविधाएं तार-तार हो गई किसी भी प्रकार का नियोजन तार-तार दिखाई दिया l जिसमें सरकार की गलती ना के बराबर है इसमें विशेषज्ञों की गलती 100% है l जिन्होंने गलत आंकड़ों को दिखाया है हां सरकार की गलती सिर्फ इतनी है कि चाटुकारिता के आधार पर उन्हें विशेषज्ञ मान लियाl ऐसो आराम करवाया l
शर्म की बात यह है कि कोरोना काल में आम नागरिक दाने-दाने को मोहताज है वहीं covid-19 स्टिकर लगी गाड़ियां मध्य प्रदेश सागर सीहोर में उत्तर प्रदेश से 956 खाद्य रसद बोरियों के साथ पकड़ी गई जबकि सरकार सहायता का दावा कर रही थीl और ऐसे काल में जब प्रत्येक कोटा धारक के पास एक एक अधिकारी नियुक्त किया गया था फिर यह रसद सामग्री कहां से आई तब विशेषज्ञता उन्हीं वादों को मंडी में सरकार की ही दुकान पर बिकवा रही थी l
सरकारी कृपा पात्र विशेषज्ञों से अनुरोध है कि कम से कम जनता के हितैषी नहीं तो सरकार हितेषी तो बने रहो l ऐसे में कोई बात आग की तरह फैल रही है तब कम से कम सरकार के वफादार तो बने रहो यूं आम दिनों में तो आप फजीहत करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ते l
अब आनेवाले वाले दिनों में सरकार व सरकारी विशेषज्ञों के समक्ष यह चुनौती होगी कि कोरोना की तरह यदि भविष्य में कोई आपदा आए तो उस से कैसे निपटा जाए ताकि देश का प्रत्येक नागरिक सुरक्षित रहे ,तथा देश में दूसरी जरूरी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित रहें सरकार के समक्ष भी यह प्रश्न होगा चुनौती होगी कि क्या इन्हीं विशेषज्ञों को वह अपना आधार बनाए रखेगी या इनमें बदलाव होगा यदि सरकार को जग हसाई से बचना है और देश के प्रति भरोसेमंद रहना है तो निश्चित रूप से इन विशेषज्ञों की कार्यप्रणाली का संज्ञान लेकर इन्हें बाहर का रास्ता दिखाना होगा ताकि देश में सरकार की जग हंसाई बच जाए तथा देश में अमन का माहौल कायम रहे l