आगरा उत्तर प्रदेश । डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पालीवाल पार्क परिसर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ एवं ग्राम्य विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। मुख्य वक्ता आर.बी.एस. कॉलेज के प्रो. अरुण कुमार राघव ने अपने संबोधन में कहा कि नैतिकता के आधार पर ही समाज और राष्ट्र का समग्र उत्थान संभव है। उन्होंने एकात्म मानववाद की अवधारणा को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए बुद्धि, शरीर और आत्मा के संतुलित विकास पर जोर दिया।

संस्थान की डॉ. राधिका गोयल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक विचारों पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र को एक जीवंत सांस्कृतिक सत्ता बताया। उन्होंने अंत्योदय, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की अवधारणाओं को भी रेखांकित किया। नम्रता तोमर ने विद्यार्थियों के लिए उनके विचारों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. आभा सिंह ने एकात्म दर्शन को भूगोल एवं पर्यावरणीय संतुलन से जोड़ते हुए सीमित संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया। अंतिम सत्र में डॉ. आयुष मंगल ने कहा कि समग्र विकास के लिए ‘जो कमाएगा वह खिलाएगा’ की भावना आवश्यक है।
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। गोष्ठी का संचालन डॉ. तपस्या चौहान ने किया। इस अवसर पर अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।