संवाददाता : आशीष कुमार
इटावा/जसवंतनगर। ग्राम जैनपुर नागर में आयोजित “बौद्ध भीम गाथा” कार्यक्रम के दौरान उस समय भावुक माहौल बन गया, जब कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पिता रामजी मालोजी सकपाल के संघर्षपूर्ण जीवन का मार्मिक वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि रामजी सकपाल ब्रिटिश भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे और उनका जीवन अनुशासन, शिक्षा एवं उच्च संस्कारों से परिपूर्ण था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास किए।

कथा के दौरान प्रेमा अम्बेडकर ने कहा कि उस समय समाज में गहरा भेदभाव व्याप्त था, लेकिन रामजी सकपाल ने अपने पुत्र को यह अमूल्य सीख दी कि “ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है।” उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
उन्होंने यह भी बताया कि जब स्कूल में बाबा साहेब को भेदभाव का सामना करना पड़ता था, तब उनके पिता उन्हें धैर्य, संयम और संघर्ष की प्रेरणा देते थे। उनका सपना था कि उनका पुत्र शिक्षित होकर समाज में परिवर्तन लाए और अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ा हो।
कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एक पिता के संस्कार, मार्गदर्शन और त्याग ही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं। यही प्रेरणा आगे चलकर डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महान व्यक्तित्व के निर्माण का आधार बनी।
कार्यक्रम के दौरान चरण सिंह (शिवराजपुर) एवं नाथूराम (चाबच्चा) ने कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर को नोटों की माला पहनाकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर अर्जुन सिंह, हुकुम सिंह, भीम प्रकाश, आनंदप्रिय गौतम, राजेंद्र सिंह, भारत सिंह, अकल सिंह, चन्द्र प्रकाश, रंजीत बाबू, अशोक कुमार, ध्रुव सिंह (एडवोकेट), रमेश कुमार (डीलर), तिलक सिंह, रमाकांत, सुशील कान्त (पत्रकार), सत्येंद्र सिंह (मास्टर), सतीश बाबू, सचिन, मातादीन, महेश, मायाराम, गंगादीन सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और आयोजन की सफलता में सक्रिय भागीदारी निभाई।