BiharNews विजयदशमी के दिन ही सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी

BiharNews Emperor Ashoka embraced Buddhism on the day of Vijayadashami.
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संवाददाता मोहन सिंह

बेतिया/ पश्चिमी चंपारण।
अशोक विजयदशमी के उपलक्ष्य में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रबुद्ध भारती द्वारा कहा गया है कि आज के ही दिन सम्राट अशोक ने ईसा पूर्व करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व तथागत भगवान बुद्ध के विचारों से प्रभावित होकर कलिंग युद्ध के पश्चात बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। एवं उसके प्रचार प्रचार हेतु उन्होंने अपने सगे पुत्र महेंद्र, बेटी संघमित्रा तक को भी सुदूर दूसरे देशों में धर्म प्रचार के लिए भेजा। संघमित्रा को नेपाल और बेटे महेंद्र को श्रीलंका उन्होंने भेज।, तथा आज पूरी दुनिया में तथागत बुद्ध के बिना गए ही भारत की सभ्यता संस्कृति पूरी दुनिया में पहुंची है, उसमें प्रथम धर्म प्रचारक सम्राट अशोक के पुत्र महेंद्र और संघमित्र। का बहुत बड़ा योगदान है। सम्राट अशोक ने भगवान बुद्ध के 84 हजार धमपदों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए 84 हजार शिलालेख, अस्पताल , पशु चिकित्सालय ,सराय एवं विद्यालय तथा स्तूप एवं अशोक स्तंभ स्थ।पित किये ।

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चंपारण अती गौरवशाली अतीत रखने वाला पूरे विश्व के मानचित्र पर वह जिला है ,जहां तथागत भगवान बुद्ध का जन्म होता है, शाक्य वंश जी रोहिणी नदी के किनारे रहते थे, वह शिकरहना लोरिया से चनपटिया होते हुए आगे बहती है ,साल पेड़ौ के तमाम घने वृक्ष एवं कोलिया वंश की राजधानी देवदाह और शाक्य वंश की राजधानी कपिलवस्तु नंदनगढ़ के रूप में आज भी पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल के रूप में साक्षात उदाहरण है। सम्राट अशोक ने, तथागत भगवान बुद्ध ने जहां से ओनम नदी में स्नान कर और तत्कालीन समस्याओं से निजात पाने हेतु, हजारों लोगों की समागम होती है तथा देश-विदेश के बौद्ध भिक्षु तथा शोधकर्ता जाकर चिंतन मंथन करते हैं, पूरी दुनिया से सबसे ज्यादा पर्यटक भारत में और चंपारण में अगर आते हैं तो इसका मुख्य कारण तथागत भगवान बुद्ध और उनके ज्ञान पर चलने वाले सम्राट अशोक के कारण से चंपारण भी आते हैं।
सम्राट अशोक ने जन्म स्थान के चिन्ह के रूप में सिंह वाले अशोक स्तंभ लौरिया में लगवाए तथा अपने दादा की स्मृति में एवं बुद्धिस्ट गणराज्य होने की कारण से पिपली वान,आज रमपुरवा में दो अशोक स्तंभ लगवाए ।चंपारण एकमात्र पूरी दुनिया की मानचित्र पर जिला है जहां तीन अशोक स्तंभ है, सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किए गए।

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आज विजयादशमी के दिन प्रबुद्ध भारती, भारत सरकार से यह आह्वान करती है ,कि जन्म स्थान के बारे में भ्रांतियां को दूर किया जाए। इसके बारे में नेपाल के राष्ट्रपति माननीय रामचंद्र पौडेल ने कहा बुद्ध को जन्म भारत में भयों। ऐसा उद्घाटित होने के बाद भारत की जिम्मेदारी बन जाती है ,कि, हम बुद्ध के जन्म स्थल चंपारण को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित करें और सम्मानित करें।

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