संवाददाता – राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली (बिहार)
03 अप्रैल 2026
राजापाकर । वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड मुख्यालय स्थित शनिचर हाट चौक पर पीएचडी विभाग द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया गया जलमीनार आज सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है। करीब 10 साल पहले लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से इस जलमीनार का निर्माण सौर ऊर्जा प्लेट के माध्यम से जल आपूर्ति के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण आज तक यह योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकी।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जलमीनार से नियमित पानी आपूर्ति नहीं होती है। कभी-कभार जब इसे चालू भी किया जाता है, तब भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ग्रामीण गजेंद्र कुमार ने बताया कि पंचायत योजना के तहत सड़क किनारे नाला निर्माण के दौरान नल-जल योजना के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।
स्थिति यह है कि जब मशीन कभी चालू होती भी है, तो पाइप फटने के कारण लोगों के घरों के बाहर पानी जमा हो जाता है, लेकिन पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। इस समस्या की मरम्मत आज तक पीएचडी विभाग द्वारा नहीं कराई गई है।
प्रखंड प्रमुख ललिता देवी ने बताया कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
पीएचडी विभाग की कनीय अभियंता अनामिका ने बताया कि जलमीनार को बिजली से संचालित करने के लिए नया एस्टीमेट तैयार कर विभाग को भेजा गया है। इसके तहत 16 एचपी मोटर और एक विशेष ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों—राजीव रंजन उर्फ पंकज यादव, नथुनी प्रसाद सिंह, तपसी प्रसाद सिंह, जयपत प्रसाद सिंह, अरविंद सिंह, रंजन कुमार और महेश प्रसाद सिंह—ने विभाग से जल्द से जल्द जलमीनार को चालू करने की मांग की है, ताकि भीषण गर्मी में लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।