संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
लगातार दो दिनों से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रुक रुक कर हो रही झमाझम बारिश ने पूजा को छिन्न-भिन्न कर दिया और छात्रों के पूजा की तैयारी पर पानी फेर दिया। लेकिन शनिवार को 11:00 बजे के बाद बारिश रुक जाने पर सूरज की लुकाछिपी के बीच किसी प्रकार छात्रों ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना किया। अन्य सालों की अपेक्षा सरस्वती पूजा में छात्र छात्राओं का उत्साह इस वर्ष नहीं दिखा। जिले में बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त नजर आया। प्रकृति का प्रकोप व कोविड-19 का पूरा असर मूर्तिकारों पर भी बुरी तरह से पड़ा। मूर्ति का उन्हें उचित दाम नहीं मिल सका और किसी प्रकार से कम दामों में मूर्ति को बेचकर अपनी पूंजी को निकालने में लगे दिखें।

सरस्वती पूजा के पंडालों के साज सामान बेचने वाले भी 25 प्रतिशत भी बिक्री नहीं होने का रोना रोते देखें गए। वहीं पूजा के लिए प्रयुक्त फल व मिठाई पर भी भक्तों की भीड़ नहीं देखी गई जिसके कारण फल दुकानदार भी सरस्वती पूजा की पूरी उल्लास में कमी का रोना रोते रहें। कुल मिलाकर कोविड-19 और प्रकृति के कारण पूजा की बस कोरम पूरा किया नजर आया।
