Bihar News- प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों में शारदीय नवरात्र के सप्तम तिथि को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा अर्चना हर्षोल्लास के साथ की गई

Bihar News- On the seventh day of Sharadiya Navratri, the seventh form of Maa Durga, Maa Kalratri, was worshipped with great joy in various puja pandals of the block area.
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संवाददाता राजेन्द्र कुमार

राजापाकर/वैशाली

साथ नहीं पूरे विधि विधान के साथ राजापाकर बाजार स्थित बड़ी दुर्गा माता मंदिर, भुवनेश्वर चौक स्थित छोटी दुर्गा माता पूजा समिति, शनिचर हाट, हाई स्कूल चौक, कुशवाहा चौक सहित प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों में आचार्य द्वारा उपचारित वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि विधान के बीच मां दुर्गा के प्रतिमा का पट खोला गया। इस अवसर पर पूजा पंडालों में सैंट्रो की संख्या में महिला भक्त श्रद्धालु उपस्थित हुए।

Bihar News- On the seventh day of Sharadiya Navratri, the seventh form of Maa Durga, Maa Kalratri, was worshipped with great joy in various puja pandals of the block area.आचार्य द्वारा उच्चरित वैदिक मंत्रोच्चार एवं मां के जयकारे से पूरा वातावरण भक्ति में हो गया। नवरात्रि की सप्तमी तिथि को एक तरह मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है। वहीं दूसरी तरह पंडालों में मां दुर्गा की आंखों से पट्टी हटाई जाती है। माना जाता है कि इसी क्षण से देवी दुर्गा की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा होती है। और वे पूरी तरह जाग्रत हो जाती हैं। नवरात्रि में सप्तमी तिथि का अपना अलग ही महत्व है और इस तिथि को महासप्तमी तिथि भी कहा जाता है. सप्तमी तिथि को दुर्गा पूजा का पहला दिन माना जाता है। क्योंकि इस दिन पंडालों में इस दिन माता की आंखों से पट्टी हटाई जाती है। खासकर पूर्वी भारत के पंडालों में सप्तमी को देवी की प्रतिमा की आंखों पर लगी पट्टी हटाई जाती है। इसे माना जाता है कि इसी क्षण से देवी दुर्गा की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा होती है और वे पूरी तरह जाग्रत हो जाती हैं।

Bihar News- On the seventh day of Sharadiya Navratri, the seventh form of Maa Durga, Maa Kalratri, was worshipped with great joy in various puja pandals of the block area.
मां दुर्गा के साथ-साथ इनकी भी आंखों से हटती है पट्टी
पंडालों में मां दुर्गा के साथ-साथ माता सरस्वती, माता लक्ष्मी, गणेशजी और कार्तिकेय जी की मूर्तियां होती हैं और इस दिन सभी की आंखों पर लगी पट्टी को हटाया जाता है। प्रतिमा निर्माण की शुरुआत महालया से पहले ही हो जाती है, लेकिन मां की आंखें आखिरी चरण में बनाई जाती हैं। परंपरा है कि सप्तमी के दिन देवी की आंखों को पूरी तरह से सजाया-संवारा जाता है और पट्टी हटाकर माता का दिव्य स्वरूप प्रकट किया जाता है। इसे चक्षु दान भी कहा जाता है। पट्टी हटने के बाद माना जाता है कि देवी दुर्गा धरती पर अवतरित हो चुकी हैं और अपने भक्तों की प्रार्थना सुनने लगी हैं।

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