संवाददाता, मोहन सिंह
बेतिया भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य सुनील कुमार यादव ने बयान जारी कर कहा कि नीतीश कुमार- योगी की डबल इंजन की सरकार का प्रदेश के श्रमिकों-कर्मचारियों पर डबल हमला कर रहीं है। इसके पहले केंद्र की मोदी सरकार अपनी चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) लागू कर मजदूर अधिकारों पर हमला बोल चुकी है। योगी सरकार कोरोना की आड़ में कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती कर रही है। वैसे भी एस्मा जैसे कानून काले कानूनों की श्रेणी में आते हैं और योगी सरकार छह-छह महीने का लगातार तीसरी बार विस्तार देकर कानून का बेजा और गैर-लोकतांत्रिक इस्तेमाल कर रही है।
माले नेता ने कहा कि कोरोना से लड़ने की अगली कतार में शामिल स्वास्थ्य कर्मचारियों और स्कीम वर्करों की योगी और नितीश सरकार में उपेक्षा हो रही है। यूपी में सोलह सौ से ऊपर शिक्षकों-कर्मियों ने पंचायत चुनाव में ड्यूटी करते हुए कोरोना संक्रमण से अपनी जानें गंवा दीं। वही बिहार में भी आशा कार्यकर्ताओं और रसोइयों ने जाने गंवाई है लेकिन सरकार जिस तरह कोरोना से आम मौतों को छुपाने में लगी है, उसी तरह ड्यूटी के दौरान हुई इन मौतों को भी नहीं स्वीकार कर रही है। उसे डर है कि जानें गंवाने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मियों के संगठन या उपेक्षित स्किम वर्करों की यूनियनें अपने वाजिब हकों के लिए हड़ताल के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग न करने लगें। यह एक तरीके से उन्हें चुप कराने की कार्रवाई है। माले ने एस्मा को रद्द करने की मांग की।