संवाददाता: मोहन सिंह
स्थान: बेतिया (पश्चिमी चंपारण)
बिहार की सांस्कृतिक पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होती दिख रही है। कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने अपनी मॉरीशस यात्रा के दौरान भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दी।

इस दौरान उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से शिष्टाचार मुलाकात की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें दोनों देशों की साझा विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव साफ झलकता है। सचिव ने बिहार सरकार की ओर से उन्हें बिहार दिवस के अवसर पर बिहार आने का निमंत्रण भी दिया।
मधुबनी पेंटिंग को मिलेगा वैश्विक मंच
बैठक के दौरान मधुबनी पेंटिंग प्रमुख चर्चा का विषय रही। सचिव ने बताया कि मॉरीशस के लोगों में इस पारंपरिक कला को सीखने की गहरी रुचि है।
दोनों देशों के बीच कलाकारों के आदान-प्रदान, प्रदर्शनी और आर्ट कैंप आयोजित करने की योजना बनाई गई है। साथ ही ऑनलाइन ट्रेनिंग और कक्षाएं शुरू करने पर भी सहमति बनी, जिससे यह कला वैश्विक स्तर पर और फैल सके।
पांडुलिपियों के संरक्षण पर सहमति
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन को लेकर भी लिया गया।
सचिव प्रणव कुमार ने कहा:
“हमारी पांडुलिपियां केवल कागज नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा हैं। इन्हें नई तकनीक के जरिए संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है।”
भारत-मॉरीशस सांस्कृतिक रिश्ते होंगे मजबूत
अपनी यात्रा के दौरान सचिव ने भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों से भी मुलाकात की, ताकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को और गति दी जा सके।
उन्होंने मॉरीशस के प्रतिनिधियों को बिहार आने का निमंत्रण दिया और विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।
रोचक तथ्य
मॉरीशस की लगभग 60-70% आबादी की जड़ें बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं। ऐसे में यह पहल दोनों देशों के बीच भावनात्मक रिश्तों को और गहरा करेगी।