Bihar News :बेतिया पश्चिमी चंपारण में किसानों और मजदूरों ने एसआईआर के विरोध में किया प्रदर्शन, सोवा बाबू चौक पर जलाया पु
संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। संयुक्त किसान मोर्चा, पश्चिमी चंपारण जिला इकाई की ओर से 23 अक्टूबर को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर किसानों और मजदूरों ने मार्च निकाला। मार्च रिक्शा मजदूर सभा भवन, बेतिया से शुरू होकर सोवा बाबू चौक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। इस दौरान वक्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय किसान कमेटी के सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार निर्वाचन आयोग का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत प्रपत्र-6 जैसे वैधानिक प्रपत्रों में बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। उनके आरोप के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रपत्रों में बदलाव किया, जिससे वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनकी बर्खास्तगी की मांग की।
एसआईआर वापस लेने की मांग
एटक नेता ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि 23 अक्टूबर को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा तथा एसआईआर वापस लेने की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत बेतिया में प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने से नागरिकों के मतदान के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग की।
ओमप्रकाश क्रांति ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित हमलों और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा लहराने के कार्यक्रम के दौरान दमनात्मक कार्रवाई की गई और कनॉट प्लेस को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार तथा निर्वाचन आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
किसान-मजदूर संगठनों के नेताओं ने भी रखे विचार
सभा को बिहार राज्य किसान सभा के जिला सचिव प्रकाश कुमार वर्मा, संयुक्त सचिव मोहम्मद वहीद, जगरनाथ यादव, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के जिला अध्यक्ष मानती राम, सीटू के महासचिव शंकर कुमार राव, अध्यक्ष नीरज बरनवाल, रमेश यादव, डीवाईएफआई के जिला अध्यक्ष मोहम्मद सहीम, जयनाथ प्रसाद, मुस्तकीम साई और हरेश कुमार सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित अनियमितताओं की जांच कराने और नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से एसआईआर प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
नोट: समाचार में निर्वाचन आयोग, एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित आरोप प्रदर्शन में शामिल नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।