Bihar News :बेतिया में किसानों और नागरिक समाज का धरना, SIR रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग
संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बेतिया के शहीद पार्क में अखिल भारतीय किसान महासभा और नागरिक समाज बेतिया की ओर से धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र तथा नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।
वक्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल रद्द करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इस संबंध में राष्ट्रपति के नाम अपनी मांगें रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि किसान और नागरिक समाज लोकतंत्र तथा मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने, मतदाता सूची से कथित तौर पर बिना पारदर्शिता हटाए गए नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि चयन पैनल में प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत कैबिनेट मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया है। उन्होंने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची से वास्तविक नागरिकों के नाम हटाए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नागरिक समाज बेतिया के समाजसेवी पंकज ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार से संबंधित प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का विरोध

नागरिक समाज के नंदलाल प्रसाद ने एसआईआर के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर युवा महिला छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस और आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
किसान महासभा के राज्य परिषद सदस्य बिनोद यादव ने महिला छात्रों और पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रहे, तो किसान उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने को मजबूर होंगे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बताया मौलिक अधिकार
किसान महासभा के जिला सचिव इंद्रदेव कुशवाहा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा या दमन की कार्रवाई संविधान और कानून के शासन की भावना के विपरीत है।
नागरिक समाज के समाजसेवी रामेश्वर प्रसाद ने न्यायपालिका, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय, से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित घटनाओं पर संज्ञान लेने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
कथित अवैध हाउस अरेस्ट पर जताई नाराजगी
एक्टू के जिला संयोजक जवाहर प्रसाद ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके घरों में रोककर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इसे नागरिकों की निजता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाने और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
नागरिक समाज के अमरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों के अधिकारों का सम्मान और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के समक्ष रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
कई किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखे विचार
कार्यक्रम में फरहान राजा, नवीन मुखिया, मुन्ना सिंह, नागरिक समाज के शेषनाथ प्रसाद, बालदेव प्रसाद, आस मोहम्मद मियां, अमर राम, संत राम और रैफूल आलम सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। इसके अलावा संजय राम, अच्छेलाल राम, बजावल राम, संजय यादव, संजय मुखिया, भरत शर्मा और सुरेंद्र चौधरी समेत कई किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।

धरने के दौरान वक्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा,मतदाता सूची में पारदर्शिता, मतदान के अधिकारों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। कार्यक्रम का मुख्य संदेश लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आवाज उठाना रहा।