Bihar News: बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत राजापाकर प्रखंड के उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलकुंडा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हाजीपुर (वैशाली) के निर्देशों के आलोक में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र–छात्राओं के साथ-साथ समाज में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूकता फैलाना तथा इसके दुष्परिणामों से अवगत कराना था। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में जागरूकता सत्र के साथ हुई, जिसमें बाल विवाह से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

विधिक सेवक पंकज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं पर इसके नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करते हुए बताया कि इससे उनका स्वास्थ्य एवं सामाजिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती मीनू कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि बाल विवाह समाज की एक गंभीर समस्या है, जिसे समाप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त कर सकता है। साथ ही उन्होंने छात्र–छात्राओं से अपील की कि वे अपने परिवार और समाज में इस विषय पर जागरूकता फैलाएँ।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों द्वारा बाल विवाह के कारणों, दुष्परिणामों एवं रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक दबाव और रूढ़िवादी सोच बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं। साथ ही बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत में लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है तथा इसका उल्लंघन दंडनीय अपराध है।
इस जागरूकता कार्यक्रम में अमरेंद्र कुमार, साधना कुमारी, अवनीत कुमार, पवन कुमार आज़ाद, मंजू कुमारी, सतीरंजन मिश्रा, रामनाथ पंडित, प्रीति कुमार, आरती मिश्रा सहित अन्य शिक्षकगण एवं विद्यालय कर्मी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर छात्र–छात्राओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और बाल विवाह के विरुद्ध अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकगण, छात्र–छात्राओं एवं विद्यालय कर्मियों ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक शपथ ली। विद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।