अंबेडकरनगर न्यूज: जहांगीरगंज के कपड़ा व्यापारी के खाते से ₹1 लाख की साइबर ठगी, त्योहार से पहले लगा झटका
संवाददाता: पंकज कुमार | आलापुर, अंबेडकरनगर।
जहांगीरगंज (अंबेडकरनगर)। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में साइबर अपराधियों के निशाने पर अब छोटे व्यापारी भी हैं। अंबेडकरनगर जनपद के थाना जहांगीरगंज क्षेत्र स्थित मामपुर बाजार में एक कपड़ा व्यापारी के बैंक खातों से करीब एक लाख रुपये की संदिग्ध निकासी का मामला सामने आया है। पीड़ित व्यापारी अरविंद कुमार अग्रहरि का आरोप है कि साइबर ठगों ने उनके बैंक खातों में सेंध लगाकर कई बार में रकम निकाल ली। त्योहारों से ठीक पहले हुई इस घटना ने व्यापारी की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर दिया है।
पीड़ित अरविंद कुमार अग्रहरि पुत्र रामदयाल मामपुर बाजार में कपड़े की दुकान चलाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने नवरात्रि और दीपावली के दौरान दुकान के लिए नया माल खरीदने के उद्देश्य से अपनी मेहनत की कमाई बैंक खातों में जमा कर रखी थी। इसी बीच खातों से संदिग्ध लेनदेन के जरिए रकम निकलने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद से परिवार परेशान है और व्यापारी अपनी रकम वापस पाने के लिए पुलिस तथा संबंधित बैंक अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इंडसइंड बैंक के खाते से कई किस्तों में निकाली गई रकम
पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, इंडसइंड बैंक की टांडा शाखा में उनके खाते से 14 से 19 अक्टूबर 2026 के बीच संदिग्ध यूपीआई लेनदेन के माध्यम से लगभग एक लाख रुपये निकाले जाने की शिकायत है। उपलब्ध विवरण में 17 अक्टूबर 2026 को कई लेनदेन दर्ज हैं।
शिकायत में दर्ज लेनदेन का विवरण इस प्रकार है:
क्रमांक
निकासी की राशि
ट्रांजैक्शन रेफरेंस आईडी
1
₹18,500
S75033862
2
₹18,450
S75067536
3
₹14,999.64
S75144612
4
₹14,999.29
S75325131
5
₹14,999.63
S75339536
6
₹6,999.95
S75364011
7
₹7,999.87
S75380964
8
₹9,999.09
S75396894
9
₹7,999.80
S75413710
10
₹9,999
S75434618
पीड़ित की ओर से उपलब्ध कराए गए इन लेनदेन का कुल योग लगभग 1.24 लाख रुपये होता है। हालांकि, शिकायत में कुल नुकसान करीब एक लाख रुपये बताया गया है। ऐसे में वास्तविक नुकसान और सभी लेनदेन का बैंक स्टेटमेंट से मिलान किया जाना आवश्यक है।

यूनियन बैंक के खाते से भी संदिग्ध निकासी का आरोप
पीड़ित ने यूनियन बैंक की जहांगीरगंज शाखा के खाते से भी साइबर फ्रॉड के जरिए रकम निकाले जाने की शिकायत की है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को POS.W.7037223290 D के माध्यम से 1,464 रुपये की निकासी दर्ज है।
इस लेनदेन का ट्रांजैक्शन आईडी 8094518190 बताया गया है। पीड़ित का आरोप है कि बैंक खातों से हुई इन संदिग्ध निकासियों के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मामले में दोनों बैंकों के रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच से ही वास्तविक नुकसान तथा निकासी के तरीके की पुष्टि हो सकेगी।
त्योहारों से पहले दुकान की पूंजी पर संकट
कपड़ा कारोबारियों के लिए नवरात्रि और दीपावली का समय व्यापार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान ग्राहक नए कपड़े और अन्य सामान खरीदते हैं, जिसके चलते दुकानदार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए पहले से माल मंगाते हैं।
अरविंद कुमार अग्रहरि ने भी त्योहारों के कारोबार को देखते हुए पूंजी जुटाई थी। लेकिन खातों से संदिग्ध निकासी की घटना ने उनकी तैयारियों पर असर डाला है। व्यापारी का कहना है कि दुकान के लिए नया स्टॉक खरीदने के बजाय अब उन्हें बैंक और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस घटना से परिवार की आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं। पीड़ित को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियां जल्द जांच कर रकम वापस दिलाने में मदद करेंगी।
बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और फ्रॉड अलर्ट सिस्टम पर सवाल
घटना के बाद बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष यह जानना चाहता है कि यदि खाते से लगातार कई संदिग्ध लेनदेन हुए, तो क्या बैंक की सुरक्षा प्रणाली ने उन्हें असामान्य गतिविधि के रूप में चिह्नित किया था? क्या संबंधित बैंक ने कोई अलर्ट जारी किया और क्या समय रहते लेनदेन रोकने की संभावना थी?
हालांकि, अभी तक बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत या बैंक के भीतर से गोपनीय जानकारी लीक होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में इन आशंकाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्ध लेनदेन किस माध्यम से किए गए, क्या पीड़ित के मोबाइल या यूपीआई से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग हुआ और रकम किन खातों में स्थानांतरित की गई। संबंधित बैंक के तकनीकी रिकॉर्ड, यूपीआई विवरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत
पीड़ित अरविंद कुमार अग्रहरि ने मामले की लिखित सूचना जहांगीरगंज थाने में देने और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की है।
अब इस मामले में पुलिस और साइबर जांच एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान संदिग्ध लेनदेन का पता लगाकर संबंधित खातों तथा डिजिटल माध्यमों की पड़ताल की जा सकती है। वहीं, बैंक स्तर पर शिकायत की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा से भी मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच बैंक ग्राहकों को सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान ऐप डाउनलोड करने से बचें।
यदि खाते से अनधिकृत लेनदेन होता है, तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचित करें और साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है। शीघ्र शिकायत करने से रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जहांगीरगंज के मामपुर बाजार में सामने आया यह मामला छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। त्योहारों से ठीक पहले व्यापारी की मेहनत की कमाई से जुड़ी रकम की संदिग्ध निकासी ने कई सवाल खड़े किए हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस, साइबर जांच एजेंसियां और संबंधित बैंक इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, पीड़ित को अपनी रकम वापस मिलने और मामले की निष्पक्ष जांच होने का इंतजार है।