संवाददाता-राजेन्द्र कुमार
वैशाली/रमजान की आमद से मस्जिदों मे दो साल बाद रौनक लौट आई है।कोरोना के दौड़ मे घरो मे कैद होकर धमाज पढने वाले मुसलमानों के चेहरे खिले हूए नजर आएं।खुशी से बच्चों के चेहरे भी चमक रहे थे।

रमजान के चांद की खबर जैसे ही आम हूई मस्जिद की तरफ मुसलमानों के कदम बढ ग्एं।हर कैई नमाज के एहतमाम करने की कोशिश मे लग गया।यह महीना हर लम्हा सवाब से भरपूर है।हर लम्हा मुसलमान चाहता है कि इबादत ही मे गुजरे।मस्जिद की रौनक भी बढ जाती है।आम दिनों के बनिस्बत नमाजी की तादाद भी कसीर हो जाती है।बच्चा, बुढै या जवान,सब की चाहत माहे रमजान।बरकत से भरा होता दस्तर ख्वान,बा बरकत महीना माहे रमजान।आप सभी इस महीने की फजीलत से फैज हासिल करे।आपकी खिदमत मे मोहम्मद शाहनवाज अता।वैशाली/रमजान की आमद से मस्जिदों मे दो साल बाद रौनक लौट आई है।कोरोना के दौड़ मे घरो मे कैद होकर धमाज पढने वाले मुसलमानों के चेहरे खिले हूए नजर आएं।खुशी से बच्चों के चेहरे भी चमक रहे थे।रमजान के चांद की खबर जैसे ही आम हूई मस्जिद की तरफ मुसलमानों के कदम बढ ग्एं।हर कैई नमाज के एहतमाम करने की कोशिश मे लग गया।यह महीना हर लम्हा सवाब से भरपूर है।हर लम्हा मुसलमान चाहता है कि इबादत ही मे गुजरे।

मस्जिद की रौनक भी बढ जाती है।आम दिनों के बनिस्बत नमाजी की तादाद भी कसीर हो जाती है।बच्चा, बुढै या जवान,सब की चाहत माहे रमजान।बरकत से भरा होता दस्तर ख्वान,बा बरकत महीना माहे रमजान।आप सभी इस महीने की फजीलत से फैज हासिल करे।आपकी खिदमत मे मोहम्मद शाहनवाज अता।