
रिश्ते (लघु कथा)
कथाकार-जया मोहन ( प्रयागराज)
आज फिर बदलू की पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी।बदलू मजदूरी करते समय छत से गिर गया था।दोनों पैर टूटे थे।पत्नी की हालत देख कर भी वह कुछ नही कर पा रहा था।क्या करूँ प्रभु पानी भी झमाझम बरष रहा किसको पुकारूँ जो दाई को ले आये।आज तो मेरे पास मेरा शेरू भी नही।शेरू बदलू का कुत्ता था जहाँ काम चल रहा था वहाँ एक कुटिया ने चार पिल्लों को जन्म दिया था।दो बच्चे तो तुरंत मर गए दो बचे।एक दिन कुतिया सड़क पार कर कुछ खाने की तलाश में गयी उसके पीछे एक पिल्ला भी गया अचानक एक विपरीत दिशा से आती जीप ने उन दोनों को रौद दिया।इधर माँ के न आने से वह अकेला पिल्ला कू कू कर रो रहा था।बदलू से सुना न गया पास गया।पिल्ला डर कर भागने लगा।किसी तरह पुचकार कर बदलू ने उठाया जहाँ सब मज़दूर बैठे खा रहे थे पहुँचा।अरे ये क्या?क्यों इसे ले आये? बिना माँ के कैसे रहेगा मैं इसे पाल लूगा।
बदलू ने उसे बिस्कुट पानी मे भिगो कर खिलाये अंगौछे में लपेट दिया। पेट भरने के बाद पिल्ला सो गया। शाम घर ले गया।अरे रानी देखो मैं क्या लाया।उसे देख रानी ने मुँह बिचकाया ये क्या उठा लाये।अरे हम इसे पालेंगे इसका नाम शेरू रखेगे।ये हमारे किस काम का।ऐसा मत कहो बूढ़े बुजुर्ग कहते है ये सबसे बफादार होता है।
बदलू बेहद प्यार करता रानी उतना ही चिढ़ती।पर कहती कुछ नही।उसे घर से बाहर कर देती खाना न देती ।मूक चुपचाप सहता।बदलू का प्यार पा निहाल रहता।एक दिन बदलू जल्दी घर आया।रानी हमार बच्चा शेरू नही दिख रहा।घूम रहा होगा कही।अरे तुम्हे ध्यान देना चाहिए पास में सड़क बन रही तमाम वाहन आते जाते है।लो पानी पियो नही पहले शेरू को ले आऊं।वो जानवर है कोनो हमार बच्चा नाही।पहले खा पी लो।बदलू जाकर शेरू को ले आया क्यों तंग करता अम्मा को।तुम ही बाप बनो हमें कुत्ता की माँ न कहो।वह खोया ही रहता कि तभी शेरू की भौ भौ सुनाई पड़ी।यहाँ आ बेटवा मूक भी प्यार की बोली समझते है।दुम हिलाता वह बदलू के पास आया। बेटा जा दाई को ले आ ।तेरी माँ दर्द से तड़प रही है।प्रभु उन्हें जुबान नही देते पर समझ देते है।वह भागता हुआ दाई के घर गया।दरवाजा बंद था।बहुत भौका दाई को समझ आया की कोई बात जरूर है।किवाड़ खोला ।शेरू बैठ कर पूछ हिलाने लगा। क्या हुआ।वह धोती खिंचने लगा।बच्चो ने कहा अम्मा भीग जाओगी।मत जाओ। वह शेरू के साथ चल पड़ी। काहे रे बदलुआ ये तोर कुत्ता है ।हाँ अम्मा ।रानी तड़प रही है मोरे पैर टूटे है।
रानी ने प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।दाई ने कहा बदलू लक्ष्मी आयी।बहुत बहुत धन्यवाद अम्मा।बदलू ये तुम शेरू को दो।अगर देर हो जाती तो जच्चा बच्चा दोनों का बचना मुश्किल था।दाई ने प्यार से शेरू की पीठ सहलाई।कौन कहता है कि रिश्ते सिर्फ आदमी से आदमी के होते है।आज इसने बेटे होने का फर्ज निभा दिया।
बदलू का पैर ठीक हो गया।एक दिन बच्ची को खिलाते हुए बोला ये तुम्हारे शेरू ।तभी रानी बोली शेरू नही शेरू दादा।क्या आवाक था बदलू तुम्हे तो जानवरो से रिश्ता पसंद नही।मुझे माफ़ कर दो दाई अम्मा ने सब बता दिया।अब तो हमारे पास बेटा बेटी दोनों है।सुनो परसो राखी है बिट्टी के लिए राखी ले आना ।अरे मुँह क्या देख रहे।वो अपने शेरू दादा को बँधेगी ।
प्यार से शेरू बदलू के पैर में लोट ०गया।मानो रिश्तों पर वो अपनी मोहर लगा रहा हो।