Establishment of egalitarian society in independent India depended on Dhanna Seth: Dr. Dharmendra Kumar
लेखक: डॉ धर्मेंद्र कुमार
मन में कुंठा जागृत हुई लेखनी संग मानसिक विकार को अक्ष पटल पर रख दिया l मैं यह तो नहीं जानता कि किसे पसंद आएगा? किसे नापसंद?
पिछवाड़े में बंधा झाड़ू ,मलिन बस्ती ,बदबू दार शरीर, सड़ा गला भोजन, जिसे आज कोई खाता दिखाई देता है तो मीडिया सोशल मीडिया पर उसकी नुमाइश दिखाने में लोग व्यस्त रहते हैं l सोचो आज का बहुजन परतंत्र भारत का यही दृश्य लेकर हमेशा घूमता था l किंतु पीढ़ियों से उस अभिशाप को लिए अभिशप्त मानकर कुछ कर पाने कह पाने की स्थिति में नहीं थे l सयाजीराव गायकवाड, साहू जी महाराज ने आगे बढ़कर हमें शिक्षा की ओर प्रेरित किया है तो डॉक्टर अंबेडकर ने विलायती अंदाज में तुम्हें अधिकार दिला कर घूमने फिरने की आजादी, सामाजिक समानता ,अभिव्यक्ति की आजादी संग वोट का अधिकार दिला कर पीढ़ियों की गुलामी का नक्शा जमीदोज कर दिया l
आजादी की सांस ,ऊपर से समानता, शिक्षा का अधिकार ,नौकरियों में आरक्षण प्रदान कर कुछ लोगों को बाबू, बड़े बाबू ,आईजी, डीआईजी ,कमिश्नर, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान बना दिया l वही गोबर में लिपटे गोबर गणेश खेत खलिहान में मजदूरी करते रह गए l जो पहली पंक्ति के लाभार्थी थे उन्होंने अय्याशी पूर्ण जीवन ही नहीं जिया, विचारों में गुलामी लादकर अपने समाज को ठेंगा दिखाते रहें और अपनी जाति छुपाकर व्यभिचार को चरम पर पहुंचा दिया l सवर्ण जाति में खुद की हवस के रिश्ते कायम कर कायर और निठल्ले साबित हुए l वहीं बाद में गरीब का लड़का पढ़ लिख गया तो वह पूरी तरह बेरोजगार है ना जुगाड़ है ?ना पैसा? समाज के सामने सिर्फ मजाक बना हुआ है कुछ एक लंबरदारओं ने पार्टी बनाकर धन दौलत अर्जित कर ली है उनकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि यदि यह समस्त पार्टी धारक खुद को एक जमात में ले आए तो आर एस एस जैसी नशीली गोली को आराम से पचा सकते हैं हमारी जरूरत भी नहीं पड़ेगी ,और यह पार्टी धारक पढ़े लिखे लोगों को संगठन से बहुत दूर रखते हैं l क्योंकि वह खुद पागल किस्म के हैं देश का संविधान चलाने एक खुद को ड्राइवर बताते हैं -जिन्हें अक्षर ज्ञान नहीं हैl उन्हें चमचे घेर लेते हैं जो दलाली चोरी से सिंहासन को सींचने का कार्य करते हैं l यदि सरकार बनने का मौका लग जाए तो चौका छक्का लगाकर खुद को क्षेत्रीय हैसियत वाला बना लेते हैं l
बहुजन समाज में नेताओं की बाढ़ आ गई है 8पास ,10 पास, इंटर पास ,एकाद ग्रैजुएट ,एकाद पोस्टग्रेजुएट ,फिर दशमलव में पीएचडी, नेट, एल एल एम होंगे lसच्चाई यह भी है कि हमें 8 पास नेता जो राज्यपाल को द्वारपाल कहता है मानना पड़ेगा नहीं तो आप को बदनाम कर पार्टी विरोधी समाज विरोधी बता दिया जाएगा l इन कुपड़ों ने हमें ही नहीं संपूर्ण बहुजन समाज तथा देश को तबाह कर के रख दिया है ना खुद सुरक्षित हैं, ना सरकार, न जनता ,न बहू बेटियां, बहुजन समाज अब सिर्फ उपदेश देने पर उतारू रहता है -मंदिरों में इनकी सबसे ज्यादा भीड़, सत्संग में इनकी सबसे ज्यादा भीड़ , भंडारे में चंदा सबसे ज्यादा, अलग-अलग संगठनों पार्टियों में यही सबसे अधिक, कुछ हाथी वाले बाबा आशीर्वाद भी नहीं देते और आप से बराबर ठगी करते हैं उसमें भी सबसे ज्यादा हम ही हैं l बस हमारा काम उपदेश देना है ना कि तर्क करना, ना तार्किक विचार करना……………… धन्यवाद बहुजन समाज