संवाददाता भूपेंद्र सिंह
मुरादाबाद: सोमवार को राजकीय पोलिटेकनिक मुरादाबाद में छात्रों ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत नशा मुक्ति की शपथ ली साथ ही समाज से इस बुराई को दूर करने में अपना सहयोग देने की बात भी रखी।
इस अवसर पर राजकीय पोलिटेकनिक के प्रधानाचार्य तजम्मुल अफजाल ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणाम बताकर इससे होने वाली हानियों के बारे में बताया और भविष्य में किसी भी तरह के नशे से दूर रहने का आह्वान किया।
जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के जनपदीय सलाहकार डॉ. प्रशान्त राजपूत ने कहा कि बच्चों में यह आदत उनके सहयोगियों और करीबियों के द्वारा प्रेरित करने और दबाव बनाने के कारण आती है इसलिए यदि कोई भी नशे जैसी किसी भी वस्तु के सेवन का आग्रह करे वो आपका हितैषी कभी नहीं हो सकता इसलिए उसका विरोध करें और हो सके तो इस तरह के व्यक्तियों से दूर ही रहें। नशे की आदत को किस प्रकार से आसानी से छोड़ा जा सकता है इसके बारे में भी जानकारी प्रदान की।
जिला मधनिषेध अधिकारी गगन यादव ने बताया कि एक सर्वे के दौरान यह पाया गया है कि युवा आबादी जल्दी भ्रमित होकर किसी भी गलत संगत में पड़ सकती है यही कारण है कि विद्यालय में इस तरह के कार्यक्रम करने की आवश्यकता होती है। कई तरह के उदाहरण देकर उन्होंने विधार्थियों की नशे की बुराइयों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूचे जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चला रही है, शराब और गुटखे पर रोक लगाने के प्रयास कर रही है। नशे के रूप में लोग मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं है।
उन्होंने बताया नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता है और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता शून्य हो जाती है। ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीं कोकीन, चरस, अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता है। तम्बाकू के सेवन से तपेदिक, निमोनिया और साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती है। उन्होंने कहा कि युवाओं में नशे के बढ़ते चलन के पीछे बदलती जीवन शैली, परिवार का दबाव, परिवार के झगड़े, इन्टरनेट का अत्यधिक उपयोग, एकाकी जीवन, परिवार से दूर रहने, पारिवारिक कलह जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। अन्त में जिला मधनिषेध अधिकारी द्वारा सभी को नशा मुक्ति की शपथ दिलाकर कार्यक्रम का समापन किया गया । इस अवसर पर लगभग 90 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में पोलिटेकनिक शिक्षको का विशेष योगदान रहा।