Etawah News: स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखता कस्बा जसवंतनगर का निलोई गांव।

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संवाददााताअशीष कुमार

इटावा जसवंतनगर: निलोई गांव में घुसते ही होता है कीचड़ से स्वागत और सारे गांव की बजबजाती बदबू छोड़ती हुई नालियों के कारण मक्खी मच्छरों की भरमार है। आए दिन लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। शहर से सटे हुए गांव निलोई में लगभग पांच हजार की आबादी है जिसमें अधिकांश जातियां निवास करती हैं। गांव में अंबेडकर बौद्ध प्रवेश द्वार से घुसते ही वहां उद्घाटन वाला पत्थर ही गायब दिखाई देता है फिर कीचड़ में गिरने का खेल शुरू हो जाता है। प्रवेश द्वार से लेकर गांव में घुसते ही गंदा पानी और कीचड़ भरा है। सर्दियों में यह हालत है तो बारिश में क्या होता होगा इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। साइकिल बाइक से कई बार महिलाएं और बच्चे बुजुर्ग अक्सर गिरते दिखाई देते हैं और कई बार चोटिल हो जाते हैं। तमाम लोग तो रास्ता बदलकर प्रतापपुरा होकर शहर तक जाने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अंदर गांव की गलियां भी बुरी तरह गंदे पानी और कीचड़ से भरी रहती हैं। गांव के मुख्य तालाब की सफाई तो 20 साल से नहीं हुई इस कारण तालाब का आकार भी छोटा हो गया है अब पानी जाए कहां! तालाब पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण भी कर रखा है पिछले दो महीने पहले तमाम शिकवा शिकायतों पर सीडीओ पहुंचे थे जिन्होंने बस खड़े होकर जेसीबी से एक तरफ कुछ सफाई जरूर कराई थी उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ आज भी तालाब ओवरफ्लो है और सड़क पर पानी भरा है। दूसरी ओर प्राइमरी स्कूल के पास में गंदा पानी भरा रहता है वहां खोदा गया कच्चा नाला यूं ही गंदगी से भरा पड़ा है। शिव मंदिर के पास भी दोनों ओर की नालियां तो इतनी भरी रहती हैं कि बिना गंदे बदबूदार पानी में घुसे निकलना संभव नहीं है। ईंट पत्थर डालकर निकलने वाले लोग आए दिन गिरकर चोटिल होते रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की अधिकांश नालियां बजबजाती भरी हुईं गंदगी और बदबूदार सड़ांध छोड़ती रहती हैं जिससे तमाम बीमारियों का जन्म होता है। और आए दिन लोग बीमार होते रहते हैं।

पंचायत सचिव व प्रधान का कहना है कि गांव के लोग पानी का दुरुपयोग अधिक करते हैं जिस कारण तालाब भरा रहता है।

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