Sapno Ko-jayamohan Prayagraj Uttar Pradesh
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सपनो को।।।।

Sapno Ko-jayamohan Prayagraj Uttar Pradesh

मैं उन्मुक्त आकाश छूना चाहती
मेरे अरमानो को उड़ने दो
देखा जो सतरंगी सपना मैंने
उसको पूरा होने दो
मैं अबला नही सबला हूँ
मुझे उन्नति शिखर पर चढ़ने दो
तुमने छला मुझे हर युग मे
पहनाई पराधीनता की बेड़ी
पिता ,पति,पुत्र के सदा मैं
आधीन रही
तुम सबकी में छाया बनी पर अपना अस्तित्व में खो बैठी
मैं समझ मे छुपे हुए भेड़ियों से डरती हूँ
कही बन न जॉऊ शिकार में ये सोच के सहमी रहती हूँ
कभी कोख कभी दहेज़ के लोभ में मारी जाती हूँ
बिना कसूर ही तलाक का दंश दे घर से निकाली जाती हूँ
बस चूक गया धैर्य अब मुझे भी मन का करने दो
अपने ख्वाबो में खुशी के रंग भरने दो
कंधे से कंधा मिला तुम्हारे साथ मे चलती हूँ
शिक्षा,साहित्य,विज्ञान किसी क्षेत्र न तुमसे मैं पीछे हूँ
मेरे सपनों को अमली जामा पहनने दो
न रोको मेरी राहे मेरे सपनों को पूरा होने दो

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