प्रयागराज: अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा, चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए सरकार करेगी सहयोग
रिपोर्ट: विजय कुमार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ता समाज के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए शासन सहयोग करेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके अलावा राज्य विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है।
नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें: योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं को केवल सफल कानूनी पेशेवर बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें संवैधानिक मूल्यों का प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल किसी मुकदमे के परिणाम तक सीमित नहीं होती। उनके प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और जीवन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तभी लोकतंत्र की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जब नागरिकों का विश्वास कायम रहे। इसके लिए समय पर न्याय, निष्पक्ष सुनवाई, भेदभाव रहित व्यवहार और कानून की नजर में समानता का भरोसा जरूरी है।
अधिवक्ता कल्याण निधि पांच लाख रुपये करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा की है। अधिवक्ता के निधन की स्थिति में उनके परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु भी 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को सम्मान, सुरक्षा और कार्य करने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
700 करोड़ रुपये से बने अधिवक्ता चैंबर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि जनपदीय स्तर पर भी अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चैंबर बनाए जा चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चैंबर बनाए गए हैं। चैंबर में फर्नीचर एवं आवश्यक उपकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए न्यायपालिका या बार एसोसिएशन की ओर से मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से प्रस्ताव मिलने पर राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।
अधिवक्ता समाज की स्वतंत्रता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने प्रयागराज की धरती से जुड़े प्रमुख अधिवक्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि संगम तट स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की स्मृतियों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्र निर्माण और संविधान निर्माण में योगदान को देखते हुए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया है।
बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में न्यायपालिका से जुड़े विषयों के साथ-साथ अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी चर्चा होती है। मुख्य न्यायाधीश अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को शासन के सामने प्रभावी ढंग से रखते हैं और उनके समाधान का प्रयास किया जाता है।
न्यायिक व्यवस्था में किए गए बदलावों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में पुलिस और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई चुनौतियां थीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण क्षमता को 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष किया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले कई जिला अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। अब न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था को भी मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से अदालतों में वर्चुअल गवाही दर्ज कराने की शुरुआत हुई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन परिसरों में न्यायिक कार्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के आवास, अधिवक्ताओं के चैंबर, स्पोर्ट्स एवं इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को भी बढ़ाया गया है।
नई तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रहें अधिवक्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिवक्ताओं को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि बार ने जिस तेजी से नए कानूनों को अपनाया, वह सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। अधिवक्ताओं को तकनीक, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ विकसित करनी होगी।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अधिवक्ताओं को किया संबोधित
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयागराज आगमन पर स्वागत किया और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने अधिवक्ताओं को भवन की चाबी सौंपे जाने पर बधाई दी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास देश की न्यायिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्रयागराज में एक ओर आस्था का संगम है तो दूसरी ओर न्याय की गौरवशाली परंपरा भी है।
उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार देता है और न्याय व्यवस्था उन अधिकारों की रक्षा का विश्वास दिलाती है। सरकार कानून बनाती है और उस कानून का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि गरीब हो या प्रभावशाली, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के साथ ‘ईज ऑफ जस्टिस’ की दिशा में तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और आधुनिक न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत बार और बेंच मिलकर मजबूत न्याय व्यवस्था का निर्माण करते हैं। अधिवक्ताओं को सम्मान, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
बार एसोसिएशन ने जताया आभार
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रयागराज की धरती पर न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के प्रतिनिधियों का एक मंच पर उपस्थित होना महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिवक्ता समाज के प्रति स्नेह, सम्मान और संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों भवन की चाबी सौंपे जाने का अवसर ऐतिहासिक है। उन्होंने बार एसोसिएशन की ओर से सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिदमन सिन्हा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्तिगण, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, अपर महाधिवक्तागण, बार एसोसिएशन के महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा सांसद फूलपुर प्रवीण पटेल, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, विधायक फूलपुर दीपक पटेल, विधायक शहर उत्तर हर्षवर्धन वाजपेयी, विधायक शहर पश्चिम सिद्धार्थ नाथ सिंह, विधायक फाफामऊ गुरु प्रसाद मौर्य, विधायक करछना पीयूष रंजन निषाद, विधायक कोरांव राजमणि कोल, विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता भवन की चाबी सौंपते हुए अधिवक्ता समाज के कल्याण, आधुनिक सुविधाओं और न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।