Bihar News: कृषि विज्ञान केंद्र, हरिहरपुर में मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ

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कृषि विज्ञान केंद्र, हरिहरपुर (वैशाली) में मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में किसानों एवं ग्रामीण युवाओं को वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, स्पॉन उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की आधुनिक विधियों की जानकारी दी जा रही है।

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संवाददाता : राजेन्द्र कुमार

हाजीपुर/हरिहरपुर, वैशाली। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हरिहरपुर, वैशाली में बुधवार को “मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कविता वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने किया।

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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला कृषि आधारित उद्यम है। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती बिना खेत के भी सफलतापूर्वक की जा सकती है, जिससे सीमांत एवं भूमिहीन किसान भी अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने उत्पादन के बाद उचित प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से होने वाली हानि को कम करने पर विशेष जोर दिया।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. कविता वर्मा ने प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधि, स्वच्छ उत्पादन तकनीक तथा मशरूम से तैयार किए जाने वाले विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों की व्यावहारिक जानकारी दी।

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वहीं, डॉ. जोना दाखो, वैज्ञानिक (उद्यान विज्ञान) ने मशरूम उत्पादन की उन्नत तकनीकों, मूल्य संवर्धित उत्पादों तथा ग्रामीण स्तर पर मशरूम आधारित उद्यमिता विकास की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी और लाभकारी माध्यम बन सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजापाकर, लालगंज एवं हाजीपुर प्रखंडों के कुल 30 ग्रामीण युवक-युवतियों एवं किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, वैशाली के कर्मचारियों रमाकांत, सोनू, आरती, मोहित एवं दीपक ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की व्यावहारिक तकनीक, स्पॉन उत्पादन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) तथा मूल्य संवर्धन से संबंधित उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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