बीएमडी दयालपुर, वैशाली
संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
वैशाली जिले के बीएमडी महाविद्यालय, दयालपुर के हिंदी विभाग द्वारा ‘कबीर की साहित्य साधना’ विषय पर एक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तारकेश्वर पंडित ने की।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. तारकेश्वर पंडित ने जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संसार में जो आया है, उसे एक दिन जाना ही है। उन्होंने संत कबीर के विचारों को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, आचार्य नरेंद्र देव महाविद्यालय, शाहपुर पटोरी एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पूर्व निदेशक (वयस्क शिक्षा) डॉ. बिंदेश्वर दास ने कबीर के पदों के माध्यम से गुरु के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कबीर के साहित्य की जितनी आलोचना हुई, उतनी शायद ही किसी अन्य साहित्यकार की हुई हो। उन्होंने यह भी बताया कि कबीर ने स्वयं अपने नाम से कोई ग्रंथ तैयार नहीं किया था, बल्कि बाद में उनके अनुयायियों ने कबीर पंथ की स्थापना की।
डॉ. बिंदेश्वर दास ने कहा कि कबीर ने साहित्य की नहीं, बल्कि समाज साधना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अहंकार और पूर्वाग्रह छोड़कर गुरु के पास जाना चाहिए, तभी वह वास्तविक ज्ञान ग्रहण कर सकता है।
इस अवसर पर डॉ. महर्षि अखिलेश ने भी अपने वक्तव्य में संत कबीर के जीवनवृत्त, साहित्य और समाज सुधार संबंधी विचारों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभाष कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूजा कुमारी ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।