संवाददाता : राजेन्द्र कुमार
स्थान : काशीपुर, जिला वैशाली (बिहार)
दिनांक : 15 मार्च 2026
आरपीएस कॉलेज काशीपुर में कार्ल मार्क्स की 143वीं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम
आरपीएस कॉलेज काशीपुर में कार्ल मार्क्स की 143वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। बराटी थाना क्षेत्र के काशीपुर चकबीवी ग्राम स्थित आरपीएस कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महान क्रांतिकारी विचारक Karl Marx के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने उनके विचारों और सिद्धांतों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मार्क्सवादी नेता अमृत गिरी ने की, जबकि संचालन अधिवक्ता सुरेश प्रसाद सिंह ने किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कार्ल मार्क्स ने श्रमिक वर्ग के अधिकारों की लड़ाई को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया और “दुनिया के मजदूरों एक हो” का नारा दिया।
वक्ताओं ने कार्ल मार्क्स के विचारों पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कार्ल मार्क्स ने पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की और समाज में समानता तथा न्याय की स्थापना के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए।
वक्ताओं के अनुसार, मार्क्सवाद का मूल उद्देश्य शोषणमुक्त समाज की स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि समाजवादी क्रांति के माध्यम से ही श्रमिकों और गरीब वर्ग को वास्तविक न्याय मिल सकता है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आज भी दुनिया के कई देशों में मार्क्सवादी विचारधारा का प्रभाव देखा जा सकता है और उनके सिद्धांतों को राजनीतिक एवं सामाजिक नीतियों में अपनाया जाता है।
कार्यक्रम में इन लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। प्रमुख रूप से भगत सिंह विचार मंच के संयोजक मनोज भूषण, विजेंद्र कुमार, सुरेश प्रसाद सिंह, डॉ. नंदू दास, अमृत गिरी, इंद्रदेव राय, डॉ. रंजीत कुमार, हुलास राय सहित कई लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों में शामिल रहे।
इन सभी ने कार्ल मार्क्स के विचारों को आज के सामाजिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण बताते हुए उनके सिद्धांतों को प्रासंगिक बताया।
समाजवादी विचारधारा पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कार्ल मार्क्स केवल एक दार्शनिक ही नहीं बल्कि एक महान क्रांतिकारी विचारक भी थे। उन्होंने अपने लेखन और विचारों के माध्यम से दुनिया भर के मजदूरों और शोषित वर्ग को संगठित होने की प्रेरणा दी।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी उनके सिद्धांत सामाजिक न्याय, समानता और श्रमिक अधिकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।