अम्बेडकरनगर MDM घोटाला: ₹7.24 लाख गबन में प्रधानाध्यापिका फंसी, जांच के बावजूद कार्रवाई शून्य

IMG-20260202-WA0129
Share News

आलापुर/अम्बेडकरनगर।

अम्बेडकरनगर जनपद के जहांगीरगंज शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत उच्च प्राथमिक विद्यालय नरियांव में मध्यान्ह भोजन (MDM) योजना के तहत ₹7.24 लाख के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। इस प्रकरण में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका इसरावती देवी पर सीधे तौर पर गबन का आरोप सिद्ध होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

शिकायतकर्ता ग्रामीण पंकज कुमार द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि

प्रधानाध्यापिका ने एमडीएम खाता संख्या 117012020201832 (उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, नरियांव शाखा) से सत्र 2021-22, 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 के दौरान अपने नाम स्वयं चेक काटकर ₹4,01,795 की निकासी की। इसके अतिरिक्त अपने सगे देवर ओमप्रकाश के नाम चेक जारी कर ₹3,22,546 की धनराशि भी निकाली गई। इस प्रकार कुल ₹7,24,341 के गबन का आरोप लगाया गया है।

शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि शासनादेश के अनुसार एमडीएम योजना की राशि स्वयं के नाम से निकालना पूर्णतः प्रतिबंधित है, इसके बावजूद जानबूझकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल चार सत्रों का मामला है, जबकि प्रधानाध्यापिका की नियुक्ति दिसंबर 2019 में हुई थी, ऐसे में पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।

मामले में पहले 15 दिसंबर 2025 को आईजीआरएस संख्या 40017825037581 के तहत खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय द्वारा जांच की गई, जिसमें आरोप है कि प्रधानाध्यापिका ने अपने प्रार्थना पत्र में गबन की राशि स्वीकार की, फिर भी इसे “गलती” बताकर रिपोर्ट को हल्का कर दिया गया।

इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को पुनः आईजीआरएस संख्या 6000250298543 के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत की गई, जिसके क्रम में जिलाधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा त्रिस्तरीय जांच टीम गठित की गई।

इस टीम में खंड शिक्षा अधिकारी जहांगीरगंज संतोष पांडे, रामनगर धनपति यादव तथा भियांव के विवेक द्विवेदी शामिल रहे। जांच 13 जनवरी 2026 को पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई, लेकिन लगभग एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही निलंबन की कोई कार्रवाई की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी एवं जांच अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन व शिक्षा विभाग इस गंभीर गबन प्रकरण में वास्तविक कार्रवाई करता है या मामला कागजी जांच तक ही सीमित रह जाएगा।

Trending News