बेतिया/पश्चिमी चंपारण। संवाददाता राजेंद्र कुमार
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी 2026 को भाकपा (माले) द्वारा बेतिया के हरी बाटिका चौक स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान गांधीजी के विचारों को याद करते हुए देश में बढ़ती नफरत और विभाजन की राजनीति के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई।

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के केंद्रीय कमिटी सदस्य एवं पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या नफरत की विचारधारा के कारण हुई थी और दुर्भाग्यवश आज वही नफरत की राजनीति फिर से देश में मजबूत की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार नफरत और विभाजन को बढ़ावा दे रही है, जिससे देश की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आज संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। हाल ही में यूजीसी से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समानता से संबंधित नियमावली पर रोक ऐसे समय में लगाई गई है, जब उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, लिंग और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह रोक हाशिए पर खड़े छात्रों की उम्मीदों पर गहरी चोट है।
वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि उच्च शिक्षा में समानता अब सिर्फ संवैधानिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन-मरण का प्रश्न बन चुकी है। उन्होंने मांग की कि यूजीसी के नियमों को पूरी तरह रोकने के बजाय उन्हें और मजबूत, स्पष्ट व जवाबदेह बनाया जाए।
वहीं भाकपा (माले) जिला कमिटी सदस्य सुनील कुमार राव ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार—अहिंसा, सत्य, सामाजिक न्याय और भाईचारा—आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। भाकपा (माले) देश में बढ़ती नफरत, दमन और तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष को तेज करेगी और गांधीजी के सपनों वाले समतामूलक एवं लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के लिए आंदोलन जारी रखेगी।
सभा को फरहान राजा, सलामत, नवीन कुमार, जोखू चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, हारून गद्दी, जितेंद्र राम, राजकुमार, संजय यादव, वीरेंद्र पासवान, मंगल चौधरी, मुस्तफा सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।
सभा के अंत में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।