मनोज कुमार राजौरिया । पिछले साल अक्टूबर में चीन से निकला कोरोना वायरस देश दुनिया के हर हिस्से में पहुंचा, और हर तरफ तवाही का मंजर कायम कर दिया, जिसकी वैक्सिन बनाने में दुनियाभर के तमाम देश लगे हुए थे, वही आज दुनिया के तमाम देशों को पीछे छोड़ते हुए रूस ने कोरोनावायरस वैक्सीन बनाने में बाजी मार ली है।

मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की घोषणा की, ‘हमने कोरोना की सुरक्षित वैक्सीन बना ली है और देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है। मैंने अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है और वह अच्छा महसूस कर रही है।’
रूस ने वैक्सीन का नाम अपने पहले सैटेलाइट ‘स्पुतनिक वी’ के नाम पर रखा है। रूसी स्वायत्त धन निधि के प्रमुख का कहना है कि इस वैक्सीन के लिए 1 अरब डोज के लिए उन्हें 20 से अधिक देशों से निवेदन मिल चुका है।
रूसी अधिकारियों के मुताबिक, वैक्सीन को तय योजना के मुताबिक रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है। बताया जा रहा है कि इस वैक्सीन को सबसे पहले फ्रंटलाइन मेडिकल वर्कर्स, टीचर्स और जोखिम वाले लोगों को दिया जाएगा।
रूस ने महीने भर पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि उनकी वैक्सीन ट्रायल में सबसे आगे है और वे उसे 10 से 12 अगस्त के बीच रजिस्टर्ड करा लेंगे। हालांकि इस वैक्सीन को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन रूस पर भरोसा नहीं कर रहे। रूस पर वैक्सीन का फार्मूला चुराने के आरोप भी लग रहे हैं।
दुनिया की इस पहली वैक्सीन को रक्षा मंत्रालय और गामालेया नेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एपिडिमियोलॉजी एंड माइक्रोबायलॉजी ने मिलकर तैयार किया है। सितम्बर से इसका उत्पादन करने और अक्टूबर से लोगों को लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।