संवाददाता: मनीष गुप्ता
कहा जाता है कि मेरठ एक ऐसा शहर है। जहा पर ना तो खाने की कमी है। और ना ही पीने के लिए पानी की कोई कमी है। लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे लोगो को पीने के लिए पानी खरीदना ही पड़ेगा। एक समय ऐसा था की मेरठ शहर में कुछ कुछ दूरी पर लोगो के पानी पीने के लिए हैंड पंप लगे होते थे। और गर्मियों में रुक रुक कर पानी पीते थे। और अपने साथ बोतल भी भर कर रख लेते थे रास्ते के लिए। लेकिन अब बोतल भरना तो दूर पीने के लिए पानी मिल जाए वही बहुत है। गाड़ी में चलने वाला व्यक्ति तो पानी खरीद कर पी लेगा। परंतु एक गरीब इंसान जो दिन भर रिक्शा चलाता हो, मजदूरी करता हो, भीख मांगता हो। वो इंसान कैसे खरीद कर पानी पी सकता है। उसके लिए तो एक मात्र सहारा सड़क किनारे लगे हैंड पंप होते हैं। लेकिन वो भी अब धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं। और जो बचे है। वो कई सालो से खराब पड़े हैं। उनमें जंग लग रहा है बस लेकिन पानी नहीं निकलता है। मेरठ शहर का जाना माना सिटी रेलवे स्टेशन जहा रोज सुबह से शाम तक लाखो लोगो की आवाजाही रहती है। जिनको लाने ले जाने के लिए रिक्शा वाले ऑटो वाले खड़े रहते हैं। एक रिक्शा चालक जो एक व्यक्ति समय से स्टेशन पहुंचाता है। तपती धूप में भी। इन लाखो लोगो की भीड़ में काफी लोग ऐसे भी होते हैं जो भाग दौड़ कर स्टेशन पर पहुंचते हैं। और थकान के लिए पानी के लिए इधर उधर देखते रहते हैं। स्टेशन के बाहर दो हैंड पंप लगे हैं। दोनो ही हैंड पंप खराब पड़े है। एक हैंड पंप तीन साल से खराब है। और दूसरा हैंड पंप लगभग दो साल से खराब है। इन दोनों हैंड पंप में जंग लग रहा है। लेकिन इन हैंड पंप की देखभाल करना उस वार्ड के सभासद का कार्य होता है। वहा पर दुकान वालो ने बताया की बहुत पर प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। कोन करेगा इनकी समस्या का समाधान। कोन है जो लोगो को पानी के लिए तरसने से बचा सकता है।