ब्यूरो संवाददाता
विश्वविद्यालय शिक्षा शास्त्र विभाग में आज दिनांक 4 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षक दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार एवं एम. एड. विभागाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र प्रताप की गरिमामई उपस्थित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर किया गया तथा उपस्थित मनचासी अनुपस्थित अतिथियों का स्वागत B.Ed की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कर किया गया। इसके उपरांत कार्यक्रम में बी. एड. के विभिन्न विद्यार्थियों ने अपनी-अपने प्रस्तुतियां दी। जबकि विभाग के शिक्षक डॉ. राम सिंह यादव ने शिक्षक मूल्य एवं आदर्शवाद का व्याख्यान दिया। और आपने विद्यार्थियों को कर्तव्य परायणता का पाठ पढ़ाया और उन्हें उत्तम चरित्र निर्माण की शिक्षा दी। कार्यक्रम की अगली कड़ी के रूप में डॉ. वीर बहादुर सिंह जी ने विद्यार्थियों को आदर्शवादी शिक्षक बने की विशेषताएं बतायीं और कहा कि समाज में शिक्षकों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः हम सभी को अपने इस गौरवशाली इतिहास को मर्यादा पूर्वक बनाए रखने और इसको संरक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. माधुरी कुमारी ने विद्यार्थियों को निरंतरता और नियमितता का पाठ पढ़ाया और कहा कि जो व्यक्ति किसी कार्य को नियमित तरीके से करता है और निरंतरता के साथ करता है उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती है अतः विद्यार्थियों को चाहिए कि वे सभी निरंतरता के साथ अध्ययन अध्यापन का कार्य करें जिससे उन्हें आसानी से उनकी मंजिल प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम में बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार ने विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों के विकास और शुद्ध आचरण विकसित करने पर बल दिया। आपने बताया कि एक उत्तम शिक्षक को उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ चरित्रवान होना चाहिए बिना उच्च चरित्र के विद्वान होना भी निरर्थक है अतः समाज के अग्रणी पंक्ति के व्यक्तियों के रूप में स्थापित सभी शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उच्च चरित्र स्थापित करना चाहिए जिससे समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक दिशा प्रदान की जा सके। इसके उपरांत कार्यक्रम में उपस्थित एम. एड. विभागाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को शिक्षक की विशेषताओं एवं महत्व से अवगत कराते हुए बताया की एक शिक्षक एक सूप के समान होता है जो विद्यार्थियों की बुराइयों को निकाल कर बाहर फेंकता है और उनमें नैतिकता रूपी गुण को समाहित करता है। शिक्षक का स्थान भगवान से भी ऊपर है आपने एक श्लोक के द्वारा अपने कथन को चरितार्थ करते हुए कहा कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागु पांय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।।
अतः विद्यार्थियों को शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ उनके द्वारा बताए गए आदर्श का पालन करते हुए अपनी शिक्षा दीक्षा आरंभ करनी चाहिए। जिससे भारत की भावी पीढ़ी ऊर्जावान, शिक्षावन, नैतिकतावन एवं चरित्रवान बन सके। कार्यक्रम का संचालन बी.एड. की छात्रा आरुषि द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. चंद्रधारी यादव, डॉ. अंजु प्रभा, डॉ. प्रिंस फिरोज अहमद, रॉबिंस कुमार संतोष कुमार एवं अन्य के साथ-साथ बी. एड. प्रथम वर्ष एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी उपस्थित रहे।