मनोज कुमार राजौरिया
“कोर्ट ने कहा है कि अब किसी व्यक्ति पर एससी/एसटी एक्ट के तहत तभी मुकदमा दर्ज हो सकेगा, जब आरोपी शख्स को ये पता हो कि पीड़ित व्यक्ति किसी विशेष जाति-वर्ग से संबंध रखता है.”
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अब किसी व्यक्ति पर एससी/एसटी एक्ट के तहत तभी मुकदमा दर्ज हो सकेगा, जब आरोपी शख्स को ये पता हो कि पीड़ित व्यक्ति किसी विशेष जाति-वर्ग से संबंध रखता है. अगर अपराध करते समय आरोपी व्यक्ति को ये नहीं पता है कि पीड़ित अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंध रखता है, तो आरोपी व्यक्ति पर एससी/एसटी एक्ट के प्रावधान नहीं लगेंगे.
★ अनसूचित जाति की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को दी राहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति की बच्ची से हुए दुष्कर्म के मामले में आरोपी को राहत देते हुए ये फैसला सुनाया. कोर्ट ने जिला कोर्ट की ओर से सुनाई गई आरोपी की उम्रकैद की सजा को भी घटाकर 10 वर्ष कर दिया. अलीगढ़ के शमशाद की आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रहे जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस एसएस शमशेरी की पीठ ने ये आदेश दिया है।
★ अभियुक्त को रिहा करने का आदेश
अलीगढ़ के शमशाद पर 15 अप्रैल 2009 में एक 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज था. इस केस में शमशाद पर एससी/एसटी एक्ट के तहत भी धाराएं लगाई गई थीं. जिस पर सेशन कोर्ट ने अपराधी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट में अपील करने पर कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ये साबित नहीं कर सका कि अभियुक्त ने बच्ची की जाति वर्ग जानने के बाद अपराध किया. ऐसे में उस पर एससी/एसटी एक्ट नहीं लगता. कोर्ट ने ये भी कहा कि अभियुक्त सेशन कोर्ट की सजा के मुताबिक जिंदगी के 12 साल जेल में काट चुका है और ये हाईकोर्ट की 10 साल सजा की मंशा को पूरा करने वाला है. ऐसे में अभियुक्त शमशाद की इस सजा को पर्याप्त मानते हुए उसे रिहा किया जाता है.