लेखक डॉ धर्मेन्द्र कुमार
विलक्षण, अद्भुत ,अलौकिक, युग परिवर्तक राष्ट्र संत गाडगे महाराज का जन्म महाराष्ट्र अमरावती जिले के शेड गांव अंजनगांव 23 फरवरी 1876 को हुआ था l 1905 से 1917 तक के अज्ञात इतिहास में उन्होंने जीवन के अभावग्रस्त असली स्वरूप अपनी आंखों से देखा
था l अनेकों भूखे पेट, निर्वस्त्र, अनपढ़ ,बेकार ,बेरोजगार, निराश हताश ,कमेरे वर्ग किसान की संवेदनाएं देख उन्हें आत्मिक दुख महसूस हुआ और अपना समस्त जीवन जोखिम उठाकर उनकी सेवा में समर्पित कर दिया l उनका जन्म धोबी अछूत बिरादरी में हुआ था l तात्कालिक समाज की वर्ण व्यवस्था में व्याप्त छुआछूत उन्हें विरासत में प्राप्त हुई थी l वह इन बुराइयों को सच्चा कर्म योगी बनकर दूर करना चाहते थे l उन्होंने निज ,मन -आत्मा में दृढ़ संकल्प कर लिया कि हमें इन बुराइयों को दूर कर दुखिया मानवों की सेवा करनी है l अतः उन्होंने अपना फटा पुराना चिथड़े नुमा वस्त्र, भोजन करने के लिए एक मिट्टी का बर्तन ,एक लकड़ी लेकर महाराष्ट्र के कोने-कोने में भ्रमण कर भीख मांग कर अनेकों धर्मशाला, गौशाला, विद्यालय, चिकित्सालय का निर्माण कराया, किंतु स्वयं के लिए कुटिया का निर्माण न कर जीवन पर्यंत इन्हीं भवनों के बरामदे में या किसी पेड़ के नीचे अपना सारा जीवन बिता दिया l राष्ट्र संत गाडगे महाराज का मानना था कि भगवान मंदिर या मूर्तियों में निवास नहीं करता वहां भटकना व्यर्थ है l यदि भगवान का दर्शन करना है तो दरिद्र नारायण की सेवा (भूखों को भोजन, प्यासे को पानी, नंगे को वस्त्र ,अनपढ़ को शिक्षा, बेकार को काम, निराश को ढांढस, मूक जीवो को अभय प्रदान करना ही भगवान की सच्ची सेवा है l मनुष्य को चाहिए कि इस असली भगवान को पहचान कर उनकी तन-मन-धन से सच्ची सेवा करें lराष्ट्र संत गाडगे महाराज नशाखोरी, छुआछूत ,सामाजिक बुराइयों व किसानों के शोषण के प्रबल विरोधी थे l उनके द्वारा स्थापित “Gadge mission” आज भी समाज सेवा में अपना योगदान दे रहा है l और दरिद्र नारायण की सेवा करना उनका लक्ष्य है l अंततः समाज ,देश ,मानव की सेवा में जीवन भर तन मन धन से सहयोग व सेवा करने वाले विद्वान, युग परिवर्तक राष्ट्रसंत 20 दिसंबर 1956 को सांसारिक सेवा त्याग ब्रह्मलीन हो गए l महान कर्म योगी, जीवन को उचित सीख प्रदान करने वाले राष्ट्रसंत को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि l यह उद्गार व्यक्त करते हुए प्रिंस यशवंत राव होल्कर विद्यालय नौरंगाबाद स्थित विद्यालय में अनुसूचित जाति जनजाति प्रकोष्ठ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ धर्मेंद्र कुमार ने व्यक्त किए l इस अवसर पर कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ,वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश प्रताप सिंह धनगर एडवोकेट ,मोहम्मद हाशिम खान, डीआर दोहरे, अजहरुद्दीन, मोहम्मद अमीन भाई ,अभिषेक आजाद, इफ्तिखार मिर्जा, अटल बिहारी आदि ने राष्ट्रसंत कर्म योगी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी तथा उनकी शिक्षाओं को अमल में लाने के लिए लोगों से गुजारिश की l