विश्वासघात : जय मोहन प्रयागराज

नीरा के पड़ोस में नए किरायेदार आये थे। चकबन्दी ऑफिसर दीक्षित जी। पड़ोसी होने के नाते नीरा उनसे मिलने गयी। दरवाज़ा दीक्षित जी ने खोला।नमस्ते मैं आपकी पड़ोसी नीरा।आईये करुणा देखो कौन आया है।आवाज़ सुन कर उनकी पत्नी हाथ पोछते हुए आयी।हेलो मैं करुणा। आप समान सेट करिए मैं खाना भिजवा रही हूँ।अरे आप तकलीफ न करे हम बाज़ार से मँगवा लेंगे।इसमें तकलीफ की क्या बात है।दोपहर नीरा ने खाना भिजवा दिया
बड़ी सुन्दर सौम्य थी करुणा।दो प्यारे प्यारे बच्चो की माँ।पति पत्नी में बेहद प्रेम था दोनों की सुंदर जोड़ी।जो देखता कहता नज़र न लगे। नीरा के स्कूल में ही दोनों बच्चों का नाम लिख गया।रिया व रजत दोनों पढ़ने में तेज थे।कुछ ही दिनों में नीरा से खूब हिलमिल गए।करुणा भी खूब नीरा के पास आती जाती थी।मोहल्ले में सभी कहते दीक्षित जी बड़े सरल है कभी किसी महिला की तरफ आँख उठा कर नही देखते।सभी कहते करुणा भाग्यशाली हैं।इतना सुंदर परिवार है।इधर के दिनों से करुणा नही आयी। शायद व्यस्त ज्यादा है।रिया से पूछा तो बोली मेरी रानी मौसी आयी है।आज शाम को करुणा रानी को ले कर आयी।गोरी छरहरी लंम्बे बालो वाली रानी बेहद खूबसूरत थी। नीरा जी ये मेरी छोटी बहन गाँव से आई है वहाँ आठवीं तक ही स्कूल था अब यहीं पढ़ेगी।अम्मा नही आने दे रही थी पर इसके जीजा जिद कर ले आये।।चाय पी कर वो लोग चले गए।पता नही क्यों नीरा को बार बार मन मे आ रहा था शायद करुणा की माँ ठीक कह रही थी।विचारों को झटका मुझे क्यों परेशानी है।
अब अक्सर रानी ही दीक्षित जी के साथ निकलती। करुणा का नीरा के पास आने लगभग बन्द हो गया।।बच्चो से पूछा तो बोले मम्मी बीमार है। शाम को नीरा हालचाल लेने गयी। रिया ने द्वार खोला।अंदर गयी देख कर दंग रह गई।करुणा बेहद कमजोर व पीली पड़ गयी थी।क्या हुआ डॉक्टर को नही दिखाया।बात टालते हुए करुणा बोली अच्छा हुआ आप आ गयी।रानी कहां है।वह जीजा के साथ फ़िल्म देखने गयी है।रजत रो रहा था क्यों रो रहे हो बेटा ये भूखा है।रानी मौसी ने खाना नही दिया।वो पापा के साथ बाहर खा आती है।नीरा ने परांठा सेक कर दिया।नीरा का हाथ थाम करुणा बोली मेरी बहन व मेरे पति ने मेरे साथ विश्वासघात किया है।मेरे सीने में खंजर घोंपा है। कब दोनों एक हो गए मुझे आभाष भी नही हुआ।जानने पर मैंने कहा रानी को घर भेज दीजिये।अब तुम जाओ जहाँ जाना हो ।मैंने विरोध किया तो मारा पीटा।बच्चे सहमे से रहते है। मैं तन मन से टूट गई।वो एक इंजेक्शन रोज़ लागते है मना करने पर कहते है ताकत का है जबकि मुझे लगता है धीमे ज़हर का है ।दिनोदिन तबियत गिरती जा रही है।वह रोने लगी मुझे बच्चो की चिंता है।आप ये पत्र कोरियर करवा दीजिये। इसमें भाई को मैंने सब लिख दिया है।मेरे मरने के बाद मेरे पति न मुझे छुए न मुखाग्नि दे।।मैं दीक्षित जी से बात करूगी।कोई फायदा नही।लौटी तो सोच रही थी शायद करुणा की अम्मा ठीक ही इस नागिन को नही भेज रही थी।ये तो डायन से भी ज्यादा है वह भी सात घर छोड़ती है ये तो अपना घर निगल गयी।रात भर नीरा सो न सकी।चिठ्ठी पा कर करुणा का भाई आ गया।खूब लताडा दोनों को पर बेशर्मो को हया न आई।आज नीरा स्कूल से लौटी तो देखा दीक्षित जी के घर मे भीड़ लगी है बच्चो की रोने की आवाज़ आ रही है।समझ गयी करुणा इस नश्वर संसार को छोड़ कर चली गयी।भाई ने बहन का वादा पूरा किया दीक्षित जी को छूने भी नही दिया।
आज भाई दोनों बच्चों को ले कर जा रहा है।नीरा के पास आया धन्यवाद आपने पत्र न भेजा होता तो मैं इन बातों से अनभिज्ञ रहता अपनी बहन की अंतिम इक्षा भी पूरी न कर पाता।मेरी छोटी बहन ने सगे रिश्ते का खून कर दिया। ।अपनो के विश्वास घात से हँसता खेलता परिवार उजड़ गया। बच्चे नीरा से लिपट कर रो रहे थे।नीरा ने उन्हें प्यार कर विदा किया।थके कदमो से नीरा लौट पड़ी।
स्वरचित
जया मोहन
प्रयागराज