संवाददाता मोहन सिंह
बेतिया/ पश्चिम चंपारण
भाजपा की मोदी सरकार हमारी खेती- खेत व फसल को कारपोरेट के पक्ष में हमसे छीन लेना चाह रही है। पहले हमारी खेती में मिलने वाली सभी सुविधाओं को समाप्त कर उसे घाटे का कार्य बना दिया, फिर कानून के सहारे खेत – खेती फसल पर कारपोरेट का कब्जा दिला देना चाहती है।

उक्त बातें अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य परिषद के दूसरे दिन बैठक को सम्बोधित करते आरा सांसद सुदामा प्रसाद ने कहीं।आगे कहा कि हम किसान अब तक के इतिहास में सबसे संकट के दौर से गुजर रहे है। इसलिए कृषि को बचाने के लिए फसल पर टी -2+50% के साथ एम एस पी की कानूनी गारंटी, खाद्य सुरक्षा, संपूर्ण कर्ज माफी, कृषि मंडियों की पुनर्बहाली, सिंचाई हेतु मुफ्त बिजली, सिंचाई संसाधनों का जीर्णोद्धार व नए का निर्माण, बाढ़ सुखाड़ का स्थाई प्रबंध करें। आगे कहा कि 10 मई 1857 ऐतिहासिक दिवस पर अखिल भारतीय किसान महासभा की स्वापन दिवस पर सभी जिला मुख्यालयों पर राज्य / जिला/ अंचल कार्यालयों पर आंदोलन को सफल करे।
काराकाट विधायक अरूण सिंह ने कहा कि सिंचाई के बिना खेती की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है। आज के आधुनिक समय में भी हमारी खेती प्रकृति पर पूर्णतः निर्भर है। अतीत में बिहार में जो भी सिंचाई संसाधन थे, वे सभी सरकारी उदासीनता के कारण मृत प्राय हो चुके हैं। सभी सरकारी नलकूप बंद पड़े है। डीजल और बिजली काफी महंगी है। आगे कहा कि भाजपा के नफरत और विभाजन थी राजनीति को किसानों के हर सवालों को मजबूती से खड़ा कर लगाम लगा सकते हैं।
अखिल भारतीय किसान महासभा राज्य सचिव उमेश सिंह ने कहा कि 20 वर्षों से नीतीश बाबू बिहार की सत्ता पर कायम है। इन्होंने भी कृषि विकास की लंबी चौरी बातें कर अब तक चार कृषि रोड मैप जारी कर चुके हैं, लेकिन सिंचाई के मामले में इनका रोड मैप टांय टाय फिस साबित हो चुके हैं। सत्ता में आते ही नीतीश बाबू ने अपना किसान व कृषि विरोधी चरित्र को दिखाते हुए बिहार में ए पी एम सी एक्ट को समाप्त कर कृषि मंडियों को बंद कर दिए थे और हम किसानों को मुनाफाखोर व्यापारियों के आगोश में धकेल दिया था। तब से आज तक एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली व कृषि मंडियों को चालू करने के लिए आवाज उठा रहे हैं लेकिन ये कान में तेल डाल कर सोए हैं और अपने को किसानों की हिमायती बताने में नहीं चूकते हैं।
किसान महासभा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने कहा कि उल्टे हमारी खेतों को सरकारी गैर सरकारी विकास योजनाओं के नाम पर नष्ट व लुट की जा रही है और हमें 2013 के कानून के मुताबिक समुचित मुआवजा देने के बजाय 2013 के कृषि भूमि अधिग्रहण कानून की धज्जियां उड़ा रहीं हैं। बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिव उमेश सिंह, विश्वेश्वर यादव, पूर्व विधायक चन्द्र दीप सिंह आदि ने किया।