संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
पश्चिम चम्पारण जिला के बगहा पुलिस जिला अंतर्गत भैरोगंज थाना क्षेत्र के हरहा नदी में अवैध रुप से बालू खनन युद्ध स्तर पर जारी हो रखा है। ऐसा नहीं है कि इस हरहा नदी में पहली बार अवैध खनन की सूचना और खबर आई हो, कई एक बार यहां से अवैध खनन की सूचना स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा पुलिस और प्रशासन को दी गई, परन्तु हर बार सूचना के पश्चात कार्यवाही हुई पर जो अवैध खनन के माफिया हैं उनपर कभी भी पुलिस व प्रशासन ने कार्यवाही करना उचित नहीं समझा। जिसका परिणाम रहा कि हरहा नदी का अस्तित्व अब खतरे में आ गया है।
हरहा नदी पर बना पुल अवैध खनध के कारण ध्वस्त हो चुके हैं और उसके परिणाम स्वरूप यहां के ग्रामीण क्षेत्रों का आवागमन भी ठप हो गया है। हरहा नदी का उत्तर घाट बगहा प्रखंड के भैरोगंज थाना में आता है तो दक्षिण घाट रामनगर के गोवर्धना थाना क्षेत्र में आता है। दो थानों में आने के बाद भी इसका घाट खनन माफियाओं के गिद्ध दृष्टि से बच नहीं पाता। स्थानीय ग्रामीण सूत्रों की मानें तो थानों की मिलीभगत से ही हरहा नदी का अवैध खनन फलता फूलता रहा और सालों से अवैध खनध जारी रहा।
16 मार्च गुरूवार को भी हरहा नदी में दर्जनों मजदूरों के साथ ट्रैक्टर ट्राॅली से अवैध खनन खुलेआम युद्ध स्तर पर जारी रहा, जिसकी सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और मीडिया को दी। सूचना के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल मची और
शुक्रवार को जिला खनन निरीक्षण के नेतृत्व में अंचलाधिकारी बगहा एक अभिषेक आनंद, पुलिस निरीक्षक बगहा आनंद कुमार सिंह, बाजरा प्रभारी संजय कुमार यादव , भैरोगंज थानाध्यक्ष राम उदय ने संयुक्त रुप से अवैध खनन के विरुद्ध छापेमारी अभियान चलाया।
भैरोगंज थानाध्यक्ष राम उदय ने बताया कि छापेमारी के दौरान अवैध रुप से बालू लदे हरहा नदी से दो ट्रैक्टर ट्रॉली को जप्त किया गया तथा पुलिस की आहट पर चालक ट्रैक्टर छोड फरार हो गया। उन्होंने बताया कि अवैध रुप से खनन कराने वाले खनन माफियाओं को चिन्हित किया जा रहा है। पुलिस की इस कार्रवाई से खनन माफियाओं मे हडकंप मच गया है।
हालांकि भैरोगंज थानाध्यक्ष खनन माफियाओं को चिन्हित करने की बात बता रहे हैं जबकि स्थानीय ग्रामीणों ने एक बार नहीं कई एक बार अवैध खनन रोकने के लिए अपने दिए आवेदन में साधु यादव पिता शंभू यादव और अखिलेश यादव पिता गुद्दर यादव के द्वारा दबंगता के बल पर खनन करने की जानकारी दी, परन्तु किसी अधिकारी ने जांच कर अब तक दोनों खनन माफियाओं पर कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं दिखाई। जिसका नतीजा यह होता है कि अधिकारी भले ही बदलते रहें हैं परन्तु अवैध खनन नहीं रूक पाया और अब हरहा स्वयं अपने अस्तित्व को खोने को लाचार बैठी हुई है।
हरहा नदी के अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों के आवेदन पर एक बार नहीं लगभग दर्जनों बार छापेमारी एसडीएम, बगहा के निर्देश पर हुआ और अब तक लगभग 4 दर्जन से भी अधिक ट्रैक्टर ट्राॅली और ट्रक पकड़ा गया, फिर भी हरहा नदी का अवैध खनन और खनन माफियाओं को रोका नह जा सका। जबकि हरहा नदी का क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन यानि वन क्षेत्र से 0-9 किमी के दायरे में भी आता है, फिर भी वन विभाग के द्वारा भी कोई कार्यवाही अवैध खनन को लेकर नहीं की गई।