संवाददाता मंटू राय
सिमराहा: एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को लेकर दिए गए योग गुरु बाबा रामदेव के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अररिया में भी देखने को मिल रहा है। इस विरोध को लेकर आईएमए ने जहां पुरे भारत में मंगलवार को काला दिवस मनाया वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर योग गुरु के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है। इधर आईएमए के जिला सचिव डॉ सुदर्शन झा ने योग गुरु पर जमकर प्रहार करते हुए बाबा रामदेव को मानसिक रूप से दिवालिया घोषित करते हुए कहा कि हमारी लड़ाई ना आयुर्वेद से है, और ना ही योग से, योग एक सतत प्रक्रिया है। हमारी लड़ाई व्यक्ति विशेष से है। साधु सन्यासी वह होता है जो देश हित में काम करे। समाज हित में काम करे ना कि समाज को तोड़ने का और संक्रमित मरीजों में भय का माहौल बनाने का। वहीं अररिया आईएमए के कोषाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी डॉ अभय कुमार ने बताया कि पूरे देश में 300 से अधिक तथा बिहार में 104 डॉक्टर की मौत कोरोना संक्रमण के कारण अब तक हो चुकी है। साथ ही साथ हजारों स्वास्थ्य कर्मी, पारा मेडिकल स्टाफ भी वैश्विक महामारी का शिकार हुए हैं। इस विपदा के घड़ी में जब देश की सेवा करते हुए सैकड़ों डॉक्टरों को लाखों लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी हो तब किसी बाबा द्वारा इस तरह का अपमानित करने और मनोबल तोड़ने वाला बयान बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उनके ऊपर राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की गई है। वहीं डॉ अभय कुमार ने बाबा रामदेव के द्वारा कोरोना से बचाव के लिए इजाद की गई उनकी दवा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर संक्रमण से बचाव के लिए उनकी दवा कारगर होती तो 50 से अधिक उनके संस्थान में काम करने वाले लोग और एक उच्च पद पर कार्यरत अधिकारी की मौत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब विवाद बढ़ा तो बाबा ने तुरंत सफाई भी दे डाली। लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को तल्ख पत्र लिख उनकी सफाई को नाकाफी बताकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।