संवाददाता रनवीर सिंह । थाना चित्रहाट क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम शाहपुर ब्राह्मण झोलाछाप डॉक्टर का नाम मुकेश आगरा से रहने वाला है के इलाज से गई एक ओर महिला की जान,पेट में दर्द पर परिजनों ने कराया था भर्ती,चार घंटे में चडा दीं थीं सात बोतले,हालत बिगड़ने पर किया रैफर,सीएचसी जैतपुर में महिला को किया मृत घोषित परिजनों में मचा मातमी कोहराम।

बाह :रविवार की शाम झोलाछाप के इलाज से एक और महिला की जान चली गई। परिजनों ने पेट दर्द होने पर महिला को झोलाछाप के यहां भर्ती कराया था।उपचार के दौरान हालत बिगड़ने पर परिजन जब उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतपुर लेकर पहुंचे तो डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है झोलाछाप के इलाज से महिला की जान गई। उसने महज चार घंटे में सात बोतलें लगा दीं जिससे महिला की मौत हो गई।जैतपुर के गांव पुरा जाख की मीरा देवी 35 साल पत्नी श्याम सिंह को रविवार की दोपहर तेज पेट दर्द हुआ।परिजन उसे लेकर शाहपुर ब्रह्मण के एक झोलाछाप के यहां यह ले पहुंचे।परिजनों का आरोप है झोलाछाप ने बिना देरी किए महिला को बोतले लगानी शुरू कर दीं। जिससे महिला को थोड़ा सा आराम मिल गया।झोलाछाप ने एक के बाद एक चार घंटे में सात बोतलें लगा दीं। उनसे 1400 रुपए लेकर महिला की छुट्टी कर दी।
पति श्याम सिंह का आरोप है जैसे ही पत्नी को ले जाने लगे पत्नी की हालत बिगड़ने लगी।शरीर ठंडा पड़ गया। जिससे झोलाछाप ने हाथ खड़े कर दिए और उन्हें जैतपुर ले जाने को कहा।वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतपुर मीरा को लेकर पहुंचे तो डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। झोलाछाप की लापरवाही से पत्नी जान चली गईं। मामले पर डाक्टर जितेंद्र वर्मा का कहना है जब महिला अस्पताल में आई थी तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पति ने झोलाछाप को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उसके खिलाफ जांच और कार्यवाही की मांग की है।
गौरतलबह क्षेत्र में झोलाछापों डाक्टरों का बड़ा दल सक्रिय है जो मरीजों की जिंदगियों से खेल रहा है।जिनकी वजह से कई जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है पिछले दिनों भी बाह के अभयपुरा में एक मासूम की झोलाछाप के उपचार से मौत हो चुकी है।फिर भी अब तक स्वस्थ्य महकमे की आंखें नहीं खुल सकी हैं।
झोलाछाप पहले भी जिंदगियों से कर चुका है खिलबाड़।
बाह-शाहपुर ब्राह्मण के इस झोलाछाप के इलाज से पहले भी एक व्यक्ति की जान जा चुकी है।उसके बाद भी यह मौत का सौदागर अपनी दुकान जमाकर जिंदगियों से बदस्तूर खेल रहा है। सूत्र बताते है झोलाछाप की यह दुकान सालों से संचालित है।
मज़बूरी बने झोलाछाप :
तहसील के सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र में कोरोना काल में उपचार बड़ा मुश्किल हो गया है।कभी डाक्टर नहीं होते कभी उनकी आगरा डयूटी का हवाला दिया जाता है।मरीज घंटों इंतजार करता है और लोट जाता है।कस्बों के अधिकतर डॉक्टर लाक डाउन की वजह से लाक हैं।इसी लिए ग्रामीण अंचल की जनता झोलाछापों की शरण में जाकर जिंदगियों को दांव पर लगाने को मजबूत बनी हुईं है।