संवाददाता -राजेन्द्र कुमार
सारण /सोनपुर ।
लोभ आने के बाद लोगो के बुद्धि नष्ट हो जाते है –जगतगुरु श्री गुप्तेश्वर जी महाराज
सोनपुर । सोनपुर नखास स्थित आयोजित नौ दिवसीय १००८ श्री हरिहरात्मक महायज्ञ परम पूज्य रामानुजाचार्य गोविंदाचार्य आचार्य श्री गुप्तेश्वर जी महाराज के सन्निध्य में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त यज्ञरत्न शतक्रतु आचार्य चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी के आचार्यत्व में यज्ञ संपन्न हो रहा है। जहां बुधवार को यज्ञशाला में यजमानों के द्वारा वेदियों का पूजन उपाचार्य बृजेंद्र तिवारी, विवेक पांडेय ,कुश तिवारी,अमन शुक्ला,शुकदेव मिश्र, कुंदन पांडेय, विश्व प्रकाश त्रिपाठी, दीपक द्विवेदी, अंकुर पांडेय ने कराया। यज्ञ मंडप में भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते हुए यज्ञ मंडप में स्थापित विभिन्न देवी देवताओं को दर्शन व पूजन कर लोग धन्य हो रहे हैं ।यज्ञ में आने वाले अधिकांश महिला पुरुष भजन कीर्तन एवं रामकथा,भागवत कथा सुनकर आनंदित हो रहे हैं।राम कथा कहते हुए रामानुजाचार्य श्री गुप्तेश्वर महराज ने कहा कि ” रामस्य नाम रूपं च लीला धाम परात्परम्।
एतच्चतुष्टयं नित्यं सच्चिदानन्दविग्रहम्॥
–वशिष्ठ संहिता
इस घोर कलिकालमें भगवत्प्राप्ति के लिये भगवद्भक्ति ही सर्वोत्तम और सुगम साधन है।भक्तिका अनुष्ठान~ करने वालों के लिये महत्त्वपूर्ण साधन और भगवत्सम्बन्धी पदार्थों में चार मुख्य हैं – भगवान् के दिव्य नाम, रूप, लीला और परात्पर धाम । भगवान् के नाम-रूप-लीला-धाम –ये सभी नित्य सच्चिदानन्द-स्वरूप हैं । इनके गुण, प्रभाव, तत्त्व तथा रहस्य – इन चारोंको विशेष रूपमें समझना चाहिये । बिना नाम-रूप-लीला-धामके सफलता नहीं मिलती । ये चारों अभिन्न तो हैं ही; संग्राह्य, संकीर्तनीय, अनुष्ठेय एवं ज्ञातव्य भी हैं।

वही यज्ञाचार्य त्रिपाठी ने कहा कि जब लोगो को लोभ बुद्धि पर छा जाता है, तब बुद्धि को पूर्ण रूप से नष्ट कर देता है। किन्तु इसका पता तब ही चल पाता है, जब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं। हमारे व्यक्तित्व की सबसे बड़ी कमजोरी लोभ तथा लालच ही है। यही एक कमजोरी हमारे व्यक्तित्व की हर अच्छाई को पूर्णतया नष्ट करने में समर्थ है।
लोभ आते ही हमारी सोच, तर्क-वितर्क, चाल-चरित्र तथा आचार विचार, सब दूषित हो कर स्वयं शिथिल हो जाते हैं और केवल लोभ और लालच ही प्रभावी रह जाते हैं। अतः यदि हम किसी भी तरह सिर्फ अपनी लोभ एवं लालच की प्रवृत्ति को नियंत्रित कर लें तो वस्तुतः नकारात्मकता की जड़ को ही समाप्त कर सकते हैं। हमारे व्यक्तित्व व चरित्र की सभी विसंगतियों व आपराधिक प्रवृत्तियों के मूल में प्रायः लोभ ही होता है। अतः लोभ के ऊपर नियंत्रण का अर्थ है, अपने चरित्र की सम्पूर्ण नकारात्मकता पर पूर्ण रूप से नियंत्रण करना। यज्ञ मंडप परिक्रमा करने के उपरांत यज्ञ में आने वाले अधिकांश महिला पुरुष रेल ग्राम परिषद में यज्ञ समिति की ओर से चल रहे महा भंडारा का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं यह भंडारा सुबह करीब 11:00 बजे से लेकर देर रात तक चल रहा है इसमें दिन में चावल दाल सब्जी और रात्रि में आरा जिले के प्रचलित पूरी बुनिया सब्जी लोग ग्रहण कर रहे हैं ।
संध्याकालीन राम कथा और सांस्कृतिक कार्यक्रम सुनकर लोग मन को भक्तिमय वतावरण में ढलने के प्रयास कर रहे हैं ।