मनोज कुमार राजौरिया : कोरोना वायरस का असर चौतरफा दिखाई देने लगा है। वैश्विक मंदी की खबरों के बीच बीटेक एवं एमटेक कर रहे युवाओं के कॅरियर पर भी कोरोना की मार पड़ रही है। देश के नामीगिरामी तकनीकी संस्थानों में शुमार एमएनएनआईटी में पहले जहां कैंपस छोड़ने से पहले यहां के छात्रों के हाथों में नौकरियां होती थीं वहां आज तीस फीसदी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
एमएनएनआईटी के शैक्षिक सत्र 2019-20 में सातवें सेमेस्टर के बीटेक छात्रों के प्लेसमेंट की रफ्तार कम है। संस्थान में अब तक देश-विदेश की 80 से अधिक कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आ चुकी हैं। इनमें अब तक सिर्फ 70 फीसदी छात्रों को नौकरी मिली है। यानी बीटेक सातवें सेमेस्टर की परीक्षा दे चुके 778 छात्र-छात्राओं ने प्लेसमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें अब तक सिर्फ 540 विद्यार्थियों को नौकरी मिली है। फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही कैंपस इंटरव्यू ठप है।
परीक्षा का नया मॉडल तैयार करने में जुटीं यूनिवर्सिटी
उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालय लॉकडाउन के बाद अपनी शेष परीक्षाएं कराने का मॉडल तैयार करने में जुटे हैं। जुलाई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के लिए विश्वविद्यालयों को जून तक परीक्षाफल भी घोषित करना होगा। ऐसे में परीक्षाओं का नया मॉडल ही अपनाना होगा। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने यह कुलपतियों पर ही छोड़ दिया है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा केंद्र बढ़ाने, प्रश्नपत्रों की संख्या कम करने, प्रश्नपत्र के 5 या 6 प्रश्नों के स्थान पर केवल 4 प्रश्नों को ही हल करने, प्रश्नपत्र हल करने की अवधि तीन घंटे के स्थान पर दो घंटे किए जाने तथा परीक्षा दो पालियों की जगह तीन पालियों में कराने के बारे में फैसला ले सकते हैं।