संवाददाता–राजेन्द्र कुमार
वैशाली/हाजीपुर।
अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और बिहार राज्य उपाध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव, वैशाली जिला अध्यक्ष सुमन कुमार, वैशाली जिला सचिव और राष्ट्रीय परिषद सदस्य गोपाल पासवान, राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रेमा देवी, ने हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर स्वामीनाथन के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, कि एक कृषि वैज्ञानिक के रूप में उनके नेतृत्व में 2004 में बने भारत के कृषि आयोग द्वारा कृषि लागत में C2+50% जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की सिफारिश करना उनका सबसे बड़ा योगदान है, यही कारण है कि बढ़ते कृषि संकट के दौड़ में आज भारत के किसानों की यह मुख्य मांग बन गई है ।

यह सर्वविदित है कि 2014 में सत्ता में आने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों से स्वामी नाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा किया था, मगर साढेनौवर्षों के शासन के बाद भी मोदी सरकार ने देश के किसानों से किया गया अपना वादा पूरा नहीं किया है, इसलिए कृषिलागत मेंC2+50% जोड़कर एमएसपी के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करना हीदेश के किसानों की ओर से डा0 स्वामीनाथन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी,
यह भी याद रखना चाहिए की 70 के दशक में खाद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डॉक्टर स्वामीनाथन की नेतृत्व में जिस हरित क्रांति की नींव डाली गई थी, उसने भारत की खेती में वित्तीय और कॉरपोरेट पूंजी की घुसपैठ को तेज किया, धीरे-धीरे भारत की खेती किसानी इस वित्तीय पूंजी और कारपोरेट पूंजी के जाल में फंस गई, भारत में आज का गंभीर कृषि संकट और खेती, खाद्यान्नके भंडारण और खुदरा व्यापार पर कॉरपोरेट कंपनियों केएकाधिकार के प्रयास की जमीन यही से तैयार हुई है ।
हालांकि हरित क्रांति से भारतीय ग्रामीण जीवन में परे सामाजिक वआर्थिक दुष्प्रभावों का कुछ आकलन 2006 में जारी स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट में भी दिखाई देता है, डा0 स्वामीनाथन अमर रहें, डा0 स्वामीनाथन को लाल सलाम,