Establishment of egalitarian society in independent India depended on Dhanna Seth: Dr. Dharmendra Kumar
लेखक : डॉ धर्मेंद्र कुमार
भारत देश लंबे अरसे से गुलाम रहाl हमारी गंगा -जमुनी तहजीब को नष्ट करने का सबसे बड़ा कारण भी यही हैl साथ ही कुछ स्वार्थी ,लालची नेता और समाज के ठेकेदारों के कारण शांति और गंगा जमुनी तहजीब छिन्न-भिन्न हुई l
देश की आजादी से पहले या बाद में गरीबी एक रोड़ा है जो विकास की नई इबारत लिखने में नाकामयाब रहा हैl स्वतंत्र भारत में सरकारें आती-जाती रही l हर पार्टी ने मंच से खड़े होकर गरीबी हटाने का लच्छेदार भाषण दिया, और देते हैं l किंतु गरीबी का पहाड़ मानो दिनों दिन बड़ा होता जा रहा है l देश का बहुत बड़ा बजट गरीबों के कल्याण में खर्च होता है किंतु राशन की दुकानों पर न तो भीड़ कम हुई न सब्सिडी की दुकानों पर l इसी के नाम पर हर सरकार के नेता चोर दरवाजे से मालामाल हो जाते हैं l
सही मायने में कोई भी पार्टी गरीबी को खत्म करने की दिशा में काम नहीं करती किंतु यदि सरकार मुझसे परामर्श करें तो मैं ठीक 1 वर्ष में गरीबी जड़ से खत्म कर सकता हूं और सरकारी बजट पर एक रत्ती भर बोझ भी नहीं पड़ेगा l
करना सिर्फ यह है– कि शराब के ठेकों पर ग्राहक का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया जाए lशराब बेचने पर रोक लगाने के बजाय पूर्व की भांति बिक्री हो l सिर्फ आधार कार्ड से शराब ऑनलाइन व्यक्ति के खाते में पव्वा, अददा, बोतल दर्ज की जाए l मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि प्रति यूनिट 2 किलो चावल तथा 3 किलो गेहूं लेने वालों की हकीकत हजारों रुपए की शराब की खरीदारी उसके खाते में दर्ज पाएंगे l जो आज तक खड़े होकर के लाइन में लाभ लेते हैं और जरूरतमंदों को वास्तव में लाभ नहीं मिल पाता l बस फिर क्या गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम पूर्णतया सफल होगा lगरीब, नेता, अभिनेता ,सामाजिक कार्यकर्ता ,समाज के नागरिकों का चेहरा भी स्पष्ट उजागर होगा तब समाज भी खुशहाल होगा और देश तरक्की भी करेगा l