संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण
भारत-नेपाल सीमा से सटे वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के बिसहा गांव में किंग कोबरा के रेस्क्यू के दौरान स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी को उसी सांप ने डंस लिया। घटना के बाद उन्हें तत्काल नेपाल के त्रिवेणी स्थित मिलिट्री कैंप में उपचार के लिए भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, बिसहा गांव निवासी मुनी लाल के घर में किंग कोबरा घुस आने की सूचना मिलने पर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं और सांप को पकड़ लिया। इसी दौरान वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। वन विभाग की टीम ने किंग कोबरा को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया।
वन प्रमंडल-2 के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जानकी देवी ने वन विभाग की अनुमति के बिना किंग कोबरा का रेस्क्यू किया। आरोप है कि सोशल मीडिया के लिए वीडियो (रील) बनाने के उद्देश्य से उन्होंने सांप को अपने गले में डाल लिया, जिसके दौरान किंग कोबरा ने उन्हें डंस लिया।
रेंजर ने कहा कि वन्यजीवों के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल जोखिमपूर्ण है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन भी माना जा सकता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जानकी देवी को नोटिस जारी किया जा रहा है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में जहरीले सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में अक्सर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे गांवों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में लोग स्वयं सांप पकड़ने, उसे छूने या उसके साथ फोटो और वीडियो बनाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को दें, ताकि सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सके और किसी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।