बेतिया, पश्चिमी चंपारण।
बेतिया राज की जमीन पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई के विरोध और वर्षों से बसे लोगों को कानूनी अधिकार देने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष भाकपा माले एवं बेतिया राज भूमि अधिकार संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। धरना को भाकपा माले कमिटी सदस्य एवं पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने संबोधित किया।

अपने संबोधन में वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार बेतिया राज की जमीन पर पुराने जमींदारी प्रथा की तर्ज पर नया कानून बनाकर गरीबों को बेदखल करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह जमीन बड़े पूंजीपतियों को देने की नापाक कोशिश है।

उन्होंने जनता से अपील की कि सरकार की इस कथित असंवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाए। साथ ही घोषणा की कि पूरे जिले में एक सप्ताह का सत्याग्रह यात्रा निकाली जाएगी।
बेतिया राज भूमि अधिकार संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक संजय यादव ने कहा कि बुलडोजर न्याय का नहीं बल्कि दमन का प्रतीक बन गया है। सरकार को जनकल्याणकारी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर उजाड़ना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और जनविरोधी है।
भाकपा माले नेता विनोद यादव ने कहा कि बेतिया राज की जमीन अब बिहार सरकार में निहित है, ऐसे में दशकों से बसे लोगों को कानूनी अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन एवं गरिमा के साथ जीने के अधिकार में आवास का अधिकार भी शामिल है।
भाकपा माले नेता संजय राम ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनता की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं नवीन कुमार ने कहा कि बेतिया राज की जमीन पर रहने वाले लोग अतिक्रमणकारी नहीं बल्कि यहां के स्थायी निवासी और मतदाता हैं। यदि उन्हें अवैध कहा जाता है तो सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए।
धरना को संबोधित करते हुए प्रमिला देवी ने आरोप लगाया कि भाजपा-जदयू की सरकार गरीबों के साथ विश्वासघात कर रही है और उन्हीं लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाने की योजना बना रही है, जिन्होंने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया।
अंत में धरना-प्रदर्शन के माध्यम से जिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री के नाम मांग पत्र सौंपा गया। मांग पत्र में बेतिया राज की जमीन पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक, प्रभावित परिवारों को कानूनी अधिकार देने तथा भूमि विवादों का निष्पक्ष समाधान करने की मांग की गई।
धरना में भरत शर्मा, मुजमिल मियां, हारून गद्दी, सुरेन्द्र चौधरी, मंगल चौधरी, अशर्फी राम, महेन्द्र राम, योगेन्द्र यादव, वीरेंद्र पासवान, संजय मुखिया, अरसद, इंसाफ, जितेंद्र राम, रमाशंकर राम, सिंहासन ठाकुर, रविन्द्र राम, कमल देव राम, मोतीलाल शर्मा सहित बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।