मनोज कुमार राजौरिया सह संपादक
दो गज दूरी के साथ मास्क है जरूरी के नियम का कहीं पालन नहीं हो रहा है, हो भी रहा हे तो सिर्फ दिखाने के लिए, स्थिति यह है कि सड़क से लेकर कुम्भ व चुनावी रैलियों व पंचायत चुनावों की नुक्कड़ सभा तक भीड़ बढ़ रही है। परंतु कोई देखने वाला नहीं है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से प्रदेश के शहरों के साथ गांवों की स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। लोग लापरवाह हैं जिस कारण संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। प्रदेश के कई जिलों के अधिकांश मोहल्ले कंटेनमेंट जोन में हैं परंतु अधिकारी मौन हैं। वे न तो वहां जागरूकता अभियान चला रहे हैं और न हीं जिसे कोरोना हुआ है वह कहां रह रहा है इसकी जानकारी ले रहे हैं। कंटेनमेंट जोन में घर को चिन्हित कर बैरिकेडिग करना था परंतु नहीं हो रहा है, और यदि बेरिकेडिंग किया भी जा रहा हे तो उसकी कोई सुध बुध लेने वाला नही हे की बेरिकेडिंग लगी भी हे या सिर्फ प्रदेश सरकार के कार्यालय में फोटो भेजने तक ही सिमित थी, प्रदेश में प्रशासन ने लोगों को अपने भरोसे मरने के लिए छोड़ दिया है।

इसे प्रशासन की ढील कहें या लाचारात्म्क रैवैया इसका मालिक भगवन ही हे क्यूंकि एक और सरकार दो गज की दूरी मास्क हे जरुरी का नारा देकर लोगो को जागरूक कर कड़ाई दिखाना चाहती हे तो इसके दुसरे पहलू पर ढीलाई, क्यूंकि प्रदेश में कुम्भ के साथ साथ चुनावी माहोल में भरसक भीड़ एकत्र हो रही हे सायद हो सकता हो ऐसा इसलिए हो की कोरोना वायरस सरकार से आकर कह गया हो की मैं सिर्फ बिना भीड़ भाड बालो को ही निशाना बनाऊंगा. वही पंचायत चुनाव की छुटपुट रैलिय भी भीड़ एकत्र करने में पीछे नही हो रही, भीड़ एकत्र के साथ साथ कोविड गाइडलाइन की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही हे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश इस वक्त उन राज्यों में शामिल है, जहां पर कोरोना की रफ्तार बेकाबू होती दिख रही है। बीते दिन यूपी में 8 हज़ार से अधिक कोरोना के केस पाए गए, जो कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। उत्तर प्रदेश में हालात बेकाबू होने की ओर बढ़ रहे चुके हैं. 24 घंटे में 20 हज़ार कोरोना के मामले सामने आए हैं। नए मरीजों की संख्या लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हालात बेहद बिगड़ चुके हैं. लखनऊ पांच हज़ार से अधिक केस मिल रहे हैं। यहाँ के शमशान घाटों पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए लाइन लगी हुई है।

इसी के साथ कुछ पक्तियां जहन में आ रही हे जो आप तक पहुचाना चाहता हूँ………
“चिताओं की चिंता किसे है,मुल्क जल रहा है
सब मुमकिन है,मुल्क में चुनाव चल रहा है !
उंगली न उठाओ कि वक्त के शहंशाह हैं वे
क्या फ़र्क पड़ता है किसका जवां जल रहा है!
निश्चित ही मोक्ष मिलेगा थोक में,मेला चल रहा है
मेरी तो आँख नहीं है तुम देखो,अमृत बरस रहा है!
कौन हैं ये इंसानियत के दुश्मन, बुलाते मौत को
सवाल न कीजिये साहब, मेरा मुल्क बदल रहा है!”
श्री राम के मंदिर की आस दिलाकर सत्ता में आई सरकार ने भी अब जनता को श्री राम के भरोसे ही छोड़ दिया हे, ऐसा होता भी क्यों नही क्यूंकि हमने सरकार से चाह भी तो मंदिरों की ही की थी, यदि आपकी हमारी मांग शिक्षा, स्वास्थ व अस्पताल होती तो आज आंकड़ा मरने वालो और कोरोना ग्रसितों का नही होता जबकि ये आंकड़ा कोरोना से रिकवरी वालो का होता।
अपने लेख को विराम देते हुए यही कहूँगा कि सरकार से आस छोड़ कर यदि हम सभी एक जिम्मेदार नागरिक की भांति अपने घरों में रहे और तब तक घरों से न निकले जब तक आवश्यक न हो, निकलते भी हे तो मुह पर मास्क आने के बाद सेनिटाईजर का प्रयोग करें, न तो हम भीड़ भड़ाए न भीड़ भडने दे, तो हम स्वयं के साथ साथ अपने परिजनों को भी स्वस्थ रख पाएंगे।