आगरा । इतिमादुद्दौला से बड़ी खबर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक बार से फिर सोशल मीडिया, सफाई, सहायता और हरियाली से भर गया था। लोगों ने पेड़ लगाने, सफाई करने की तस्वीरें पोस्ट कीं, स्टेटस अपडेट किए और पर्यावरण संरक्षण की बातें साझा कीं। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर पेड़ केवल पोस्ट और लाइक-शेयर तक ही सीमित रह गए।

पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्षों से कार्यरत आगरा के ट्री मैन त्रिमोहन मिश्रा ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, लोगों ने पेड़ सोशल मीडिया पर लगाए हैं, ज़मीन पर नहीं। गमलों में पेड़ केवल आपात स्थिति में लगाना चाहिए, असली बदलाव तब होगा जब पेड़ धरती में जड़ पकड़ें ।

उन्होंने आगे कहा कि केवल फोटो खिंचवाकर और उसे इंटरनेट पर डालने से पर्यावरण नहीं बचेगा। ज़रूरत है कि लोग वास्तव में पेड़ लगाएं और उसकी देखभाल करें।
मिश्रा जी का मानना है कि अगर हर व्यक्ति किसी भी अवसर पर या किसी के नाम से भी पेड़ ज़मीन पर या बीज लगाए और उसकी ज़िम्मेदारी ले, तो जलवायु संकट से निपटने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे “डिजिटल ग्रीनरी” के बजाय वास्तविक हरियाली को प्राथमिकता दें और पेड़ लगाने को सिर्फ एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, हर दिन पर्यावरण दिवस मनाया जाए क्योंकि जानवरों, पशु और पक्षियों के लिए दाना पानी रखें, इनका सोशल मीडिया अकाउंट नहीं अगर होता तो ये सच्चाई ही दिखते इनकी भाषा को में अच्छे से समझता हूं। ये सबसे ज्यादा बड़े प्रकृति प्रेमी हैं , ये आपको अपने परिवार के साथ आपकी पीढ़ी भी सुरक्षित करते हैं।
आज की कार्यकर्ता टीम – ट्री मैन त्रिमोहन मिश्रा, एडवोकेट मयंक कुशवाह, एल. पी. प्रजापति, गणेश शर्मा, और अन्य प्रकृति प्रेमी।