भूख न मिट सकी उसकी
सूखे नैनो के नीर

नन्हा भूखा बिलख रहा
मिली न उसको रोटी
बहलाने को माँ ने उसके
मुँह दी अपनी फ़टी धोती
आँखो में भय है समाया
कोई न उसको छीने
बेबस हो कर चूस रहा
बेचारा वो धोती
कहां लोग कुत्ते को खिलाते
मक्खन पाव रोटी
यहाँ एक नन्हा तरस पाने
को एक टुकड़ा रोटी
ईश्वर की लीला देखो रोते
से चुप हो जाता
पा कर प्यार अपनी माता का क्षुधा भूल वो जाता
भूख न मिट सकी उसकी
सूखे नैनो के नीर
देख कर उसकी बेबसी
मन जया हो उठा अधीर
स्वरचित
जया मोहन ,प्रयागराज