मनोज कुमार राजौरिया : कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन में तमाम कालेजों में आनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई है। कस्बा में स्थित कलावती रामप्यारी बालिका इंटर कालेज में भी आनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई है। ऐसे में कई छात्राओं के सामने यह समस्या आ रही है कि उनके पास मोबाइल ही नहीं है तो ऐसे में वह पढ़ाई कैसे करें।
डीआईओएस के निर्देश पर जिले के इंटर कालेजों में आनलाइन पढ़ाई का कार्य शुरू किया गया है। कस्बा स्थित कालेज की छात्राओं के प्रवेश रजिस्टर से मोबाइल नम्बर निकालकर उन्हें आनलाइन पढ़ाई श्ुारू होने की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में कई छात्राएं ऐसी हैं जिनके पास मोबाइल नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं ने कालेज की प्रधानाचार्य गिरजा शुक्ला से उनकी समस्या का हल निकाले जाने की मांग की है। छात्राओं का कहना है कि ऐसे में पढ़ाई में पिछड़ जाएंगी।
50 प्रतिशत से भी कम बच्चों के मिले एंड्रायड मोबाइल नंबर
जानकारी के मुताबिक विकासखंड में प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में करीब 18 हजार एवं हाइस्कूल व हायर सेकंडरी में करीब 2 हजार विद्यार्थी दर्ज है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 31 मार्च को इसको लेकर आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद शिक्षकों द्वारा बच्चों व उनके पालकों के मोबाइल नंबर जुटाए गए। इसमें से बमुश्किल केवल 50 प्रतिशत से भी कम बच्चों व उनके पालकों के पास एंड्रायड मोबाइल मिल सके। इसके अलावा 8वीं एवं 10वीं से आगामी कक्षा में जाने वाले विद्यार्थियों का डाटा भी वर्तमान में स्कूलों के पास नहीं है। ऐसी स्थिति में जिनके पास मोबाइल है, वह शिक्षण सामग्री प्राप्त कर करेंगे और जिनके पास मोबाइल नहीं है, वे बच्चे इससे उपेक्षित रहेंगे।
बच्चों के घरों में नहीं, स्कूलों में रखे है रेडियो
कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए प्रतिदिन प्रात: 11 से 12 बजे तक रेडियों पर प्रोग्राम का प्रसारण होना है, लेकिन परिवारों के पास रेडियो का अभाव है। गांव के विद्यालयों में रेडियो मौजूद है, लेकिन लॉकडाउन के चलते विद्यार्थी स्कूल नहीं जा सकते, वहीं शिक्षक भी घरों से ही कार्य कर रहे है। परिवारों में रेडियों नहीं होने से बच्चों तक प्रोग्राम पहुंच नहीं सकेंगे। वनांचल के ग्रामों में तो नेटवर्क भी नहीं रहता है। जिन लोगों के पास एंड्रायड मोबाइल है, वे इस चेनल को मैच नहीं कर पाते है। मोबाइल से रेडियो का प्रसारण भी ठीक ढंग से नहीं होता है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी कार्यक्रम में रूचि नहीं लेंगे। इससे शासन का उद्धेश्य पूरा होने की संभावना कम है।
जो रोजी रोटी को तरस रहे, वे कहां से डलाएंगे डाटा पैक
लॉकडाउन के कारण कामकाज ठप पड़ें है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी मजदूर वर्ग के परिवारों को है, और शासकीय स्कूलों में अधिकंाश बच्चे इन परिवारों से ही आते है। वर्तमान में जहां मजदूर वर्ग के परिवार रोजी रोटी को तरस रहे है, ऐसे में बच्चों को यह शिक्षक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल में डाटा पैक कैसे डला पाएंगे। इसके अलावा दुकानें बंद होने से वे मोबाइल रिचार्ज कहां से कराएंगे। शिक्षकों को मिले अधिकांश एंड्रायड मोबाइलों के नंबर डाटा पैक नहीं होने के कारण बंद है।