सुनील पांडेय : कार्यकारी संपादक
उत्तर प्रदेश सरकार सत्ता के मद् में इतना चूर हो गई है है कि उसे मानवता के कार्य में भी राजनीति दिखाई दे रही है। आज देश विषम दौर से गुजर रहा है इस दौर में हमारा एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि प्रवासी भाई बहनों की की जिस भी तरह हो सके मदद की जाए। आपदा के इस घड़ी में भी देश के राजनीतिक दलों को राजनीति सूझ रही है। यह देश के लिए कितनी बड़ी विडंबना है । प्रवासी भाई बहनोंं की पीड़ा न किसी को दिखाई दे रही है और न सुनाई दे रही है । आज अन्य प्रांतों से उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में हमारी प्रवासी भाई-बहन अपने घर पैदल पलायन कर रहे हैं। उनके पास न खाने के लिए भोजन है ना रहने के लिए निवास है। जहां वह काम करते थे वहां के सेठ, ठेकेदार,और फैक्ट्री मालिकान कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है। यदि इस घड़ी में कांग्रेस की महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी 1,000 बसों को यूपी में संचालन की पेसकश कर रही हैं तो उन्हें मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है।

राजनीति के पचडे़ में उलझाते हुए कभी उनसे बसों के फिटनेस तो कभी चालकों एवं परिचालकों के नाम आदि को लेकर कागजी खानापूर्ति हो रही है। यह समय राजनीति करने का नहीं है वरन् हमारे उन प्रवासी भाई बहनों को उनके घर पर पहुंचाने का है। राजनीति करने के लिए तो समूचा कालखंड पड़ा है वह कभी भी की जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस बात की जानकारी दी जा रही है की बसों का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है ,चालक एवं परिचालक का नाम नहीं है, गाड़ी के जो नंबर दिए गए हैं उनमें कई नंबर ऐसे हैं जो टू व्हीलर एवं थ्री व्हीलर के हैं। हमें राजनीतिक दांवपेच में न पड़़ते हुए इस मजबूर मानवता की मदद करनी चाहिए। इससे उन प्रवासी भाई बहनों की मदद हो जाएगी ,जो सचमुच कई महीनों से परेशान हैं। अपनी जान को जोखिम में डालकर लगातार हजारों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं अथवा ट्रकों में भेड़- बकरियों की तरह लदें हैं और अपने गृह जनपद को जाने के लिए हर तरह का बलिदान देने को तैयार हैं। यदि उत्तर प्रदेश सरकार राजनीतिक दांवपेच न पड़कर प्रवासी भाई बहनों कि सचमुच मदद करना चाहती है अथवा उन्हें भीषण गर्मी से बचाना चाहती है तो इन 1,000 बसों को उत्तर प्रदेश में चलाने की अनुमति तत्काल दे देनी चाहिए। कांग्रेस द्वारा भेजी जा रही बसों को लखनऊ बुलाना कहां तक उचित है यदि उन्हें उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर ही परमिट दे दिया जाए तो रास्ते में जो प्रवासी भाई-बहन फंसे हैं उनको उनके गंतव्य तक सुगमता पूर्वक पहुंचाया जा सकता है। विपदा की इस घड़ी में हर व्यक्ति को मदद करने की आवश्यकता है ।इस समय राजनीतिक कटुता को भूलकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मानवता को ध्यान में रखते हुए इन बसों को तत्काल परमिट प्रदान कर देना चाहिए। राजनीति तो हम आगे भी करते रहेंगे लेकिन इन प्रवासी भाइयों बहनों की नजर में वर्तमान यूपी सरकार अवश्य गिर जाएगी। जिसका खामियाजा आने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अवश्य भुगतना पड़ेगा। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। मैंने कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी कि उत्तर प्रदेश सरकार से की गई अपील को सुना और देखा है उसमें कहीं भी हमें राजनीत की बू नजर नहीं आती, वरन् प्रवासी भाई बहनों की मदद की इच्छा शक्ति ही दिखई दे रही है। मेरा मानना है यदि बसों में थोड़ी बहुत कागजी कमी भी है या चालकों या परिचालकों के नाम में कुछ त्रुटियां भी हैं तो मानवता को तथा प्रवासी भाई बहनों के हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल इन बसों को यूपी सरकार द्वारा चलाया जाना चाहिए। लगभग 24 घंटे से अधिक समय से इन बसों को चलाने में राजनीत हो रही है । दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। आखिर इस राजनीतिक रस्साकशी में नुकसान किसका हो रहा इन प्रवासी भाई बहनों का ही तो । क्या प्रवासी भाई बहनों की पीड़ा या दर्द उत्तर प्रदेश सरकार को दिखाई नहीं दे रहा है । यह तो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। गरीब जनता के साथ जो घिनौना खेल खेला जा रहा है उसका खामियाजा उत्तर प्रदेश सरकार को आने वाले विधानसभा चुनाव में अवश्य भोगना पड़ेगा। तब आप यह नहीं कह पाएंगे कि हम उस समय राजनीति कर रहे थे । प्रवासी भाई बहनों की मदद की यदि सचमुच आप में इच्छा शक्ति होती तो कम से कम अब तक लगभग 40,000 प्रवासी भाई-बहन अपने घर को पहुंच गए होते और सभी सरकार को दुआ देते होते। मेरा मानना है यदि 1,000 बसों की संख्या में थोड़ा बहुत कम ज्यादा होता तो कोई पहाड़ नहीं टूट जाता। विपदा की इस घड़ी में हमारा उद्देश्य केवल प्रवासी भाई बहनों की मदद करना है ना कि उनके साथ इस तरह का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करना । प्रदेश सरकार सचमुच क्या आपना मानसिक संतुलन खो दिया है उसके इस कृत्य से कमोबेश ऐसा ही दिखाई दे रहा है। अंत में प्रदेश सरकार से मेरी विनम्र अपील है कांग्रेस द्वारा भेजी गई बसों को तत्काल चलाने का परमिट दिया जाए जिससे हमारे प्रवासी भाई बहनों की इस विषम परिस्थिति में मदद हो सके ।