सुनील पांडेय : कार्यकारी संपादक
भारत में कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते मार्च माह के बाद पहले दवा व्यापार की बिक्री घटी और अब दारू व्यापार की भी बिक्री घटी है ।लॉकडाउन में यदि सबसे पहले कुछ खोला गया तो वह थी दारु की दुकानें।

इन दुकानों के खुलने से विशेषकर उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली में देसी और अंग्रेजी दारू की दुकानों पर कुछ दिनों तक बेतहाशा भीड़ उमड़ी। यहां तक कि शुरुआती दिनों में लॉकडाउन के चलते फिजिकल डिस्टेंस का पालन कराने के लिए पुलिस- प्रशासन को नाकों चने चबाने पड़े। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के मॉडल शापों पर कुछ जिलों में महिलाएं भी लाइन लगातें दिखीं। मीडिया में आई खबरों के अनुसार जब उनसे इस संदर्भ में बात की गई तो महिलाओं ने अपने अलग-अलग बहाने बताए। इनमें से कुछ बहाने तो बेहद हास्यास्पद थे जिन्हें देखने एवं सुनने में हंसी आ रही थी। दारू के शौकीन लोग दिनभर चिलचिलाती धूप में लंबी लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे और जब मिली तो मानव जैसे जन्नत का सोमरस मिल गया हो। यहां तक कि मद्य विभाग द्वारा प्रत्येक दारू के शौकीनों के लिए एक लिमिट निर्धारित करनी पड़ी। हर कोई एक ही दिन में जैसे पूरे महीने का कोटा लेना चाहता था।लॉकडाउन के बाद दारू की बिक्री जिस दिन शुरू हुई दो -तीन दिन तक तो जबरदस्त राजस्व में उछाल आया । मानो ऐसा लग रहा था सरकार इसी हफ्ते में लॉकडाउन के घाटे का सारा हिसाब किताब बराबर कर लेगी। धीरे धीरे दारू की बिक्री दिन प्रतिदिन कमी आने लगी। सरकार का राजस्व लगातार कम होता गया। आज स्थिति यह हो गई है कि देश के उत्तरी राज्यों में दारू की विगत एक माह में लगभग 80% की गिरावट दर्ज की गई । मीडिया के माध्यम से अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई।इसके पश्चात बिहार से कटकर बने झारखंड राज्य, दिल्ली एवं उत्तराखंड में गिरावट दर्ज हुई है। उत्तर प्रदेश में झारखंड राज्य में तो अब स्थिति यहां तक आ गई है कुछ दारू विक्रेता अपनी शाप सरेंडर करने लगे हैं। इसके चलते इन दोनों राज्यों में काफी राजस्व नुकसान होने की आसार नजर आ रहे हैं। भारत के जिन 4 राज्यों में अब तक दारू विक्री में सर्वाधिक कमी आई है उनमें यदि उत्तर प्रदेश की बात करें पिछले दिनों 80% , झारखंड में 70% , दिल्ली में 50% और उत्तराखंड में 35% की बिक्री में कमी दर्ज हुई है। इन चारों राज्यों में उत्तराखंड की स्थिति अभी थोड़ी ठीक है यहां पर केवल पर 35 % की बिक्री में कमी दर्ज हुई है । अचानक एक माह में आई इस गिरावट से ये राज्य सकते
आ गये हैं। इन राज्यों को लग रहा था कि कोरोना संक्रमण के चलते शायद उनके आर्थिक नुकसान को मद्य विभाग से राजस्व प्राप्त करके कुछ भरपाई की जा सके,लेकिन अब इनके उम्मीदों पर तुषारापात होता नजर आ रहा है । अचानक आई इस दारू विक्री की मंदी से भले ही इन राज्यों का आर्थिक तौर पर नुकसान होता दीख रहा है ,लेकिन एक मीडिया के जिम्मेदार एवं सजग प्रहरी होने के नाते मुझे इस बात की खुशी है कि इन राज्यों में दारू की लत पालने वाले धीरे धीरे सुधर रहे हैं। मेरे जैसे दृष्टिकोण रखने वालों के लिए यह एक सुखद संकेत है, यदि ऐसी स्थिति आगे भी बनी रही तो हमें आशा ही नहीं विश्वास है कि बिहार की तरह ये राज्य भी भविष्य मैं अपने यहां दारू बंदी का एलान कर सकते हैं।