संवाददाता : राजेन्द्र कुमार
स्थान : राजापाकर, जिला वैशाली (बिहार)
दिनांक : 13 मार्च 2026
पशु एवं मत्स्य पशुपालन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान के तहत वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड क्षेत्र में पशुपालकों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बैकुंठपुर पंचायत के बैकुंठपुर ग्राम स्थित सामुदायिक भवन परिसर में पशु बांझपन निवारण शिविर सह जन-जागरूकता अभियान चलाया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन जिला मुखिया संघ अध्यक्ष, मजे लाल राय द्वारा फीता काटकर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय पशुपालक उपस्थित रहे। शिविर में पशुपालकों को पशुओं की बेहतर देखभाल, रोगों की पहचान और समय पर उपचार के बारे में जानकारी दी गई।
पशु चिकित्सकों ने किया पशुओं का परीक्षण
शिविर में राजापाकर पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक, डॉ गणेश शंकर विद्यार्थी तथा बैद्यनाथपुर पशु चिकित्सालय की पशु चिकित्सक, डॉ अदिति ने पशुपालकों द्वारा लाए गए पशुओं की जांच की।
पशु चिकित्सकों ने गाय, भैंस और अन्य पशुओं की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया। इसके साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए विभिन्न प्रकार की दवाइयों का भी वितरण किया गया।
शिविर में वितरित की गई प्रमुख दवाइयाँ
- कृमिनाशक दवा
- भूख बढ़ाने की दवा
- अठैल (फुलाव) की दवा
- डायरिया की दवा
अन्य आवश्यक पशु चिकित्सा दवाइयाँ
पशुपालकों को यह भी बताया गया कि समय पर दवा और टीकाकरण से पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है और कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।
पशुओं के टीकाकरण और पोषण पर दिया गया विशेष जोर
पशु चिकित्सक डॉ अदिति ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि यह टीकाकरण पंचायतों में स्थित डेयरी केंद्र तथा पशु चिकित्सा अस्पतालों के माध्यम से कराया जाता है।
पशुपालकों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए—
- पशुओं को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दें
- भोजन में मिनरल मिक्सर पाउडर का उपयोग करें
- हरे चारे का अधिक प्रयोग करें
- पशुओं के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराएं
विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से गाय और भैंस में होने वाली बांझपन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पशुपालकों ने शिविर का उठाया लाभ
शिविर में आसपास के गांवों से आए कई पशुपालकों ने अपने पशुओं को लाकर जांच कराई और चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया।
पशु चिकित्सकों ने बताया कि राजापाकर पशु चिकित्सालय में पशुओं के प्राथमिक इलाज के लिए सभी आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध हैं। किसान और पशुपालक अस्पताल में आकर मुफ्त या कम लागत में दवा प्राप्त कर सकते हैं।
इससे उन्हें बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पशुओं का बेहतर इलाज भी हो सकेगा।
पशुपालन को बढ़ावा देने की पहल
इस प्रकार के जागरूकता शिविर से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पशुपालन विभाग का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को आधुनिक जानकारी देकर पशुओं की
उत्पादकता बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
स्थानीय पशुपालकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के शिविरों से उन्हें पशुओं की देखभाल और बीमारी के उपचार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।