संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
26 अक्टूबर 2022 को जम्मू कश्मीर राज्य का भारत के साथ विलय की 75 वीं वर्षगांठ पर सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों बुद्धिजीवियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद शंभू शरण शुक्ल सामाजिक कार्यकर्ता नवीदूं चतुर्वेदी ,डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड ,डॉ शाहनवाज अली, डॉ अमित कुमार लोहिया, वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू शरण शुक्ल , पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन, डॉ महबूब उर रहमान एवं अल बयान के सम्पादक डॉ सलाम ने संयुक्त रूप से कहा कि आज ही के दिन आज से 75 वर्ष पूर्व 26 अक्तूबर, 1947 को कश्मीर राज्य का विलय हुआ था।विलय होते ही भारतीय सेना ने घाटी के सीमांत क्षेत्रों में पहुंचकर बिगड़ी स्थिति पर काबू पाया शुरू किया। तब से जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंक बना है।

जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय होना दशकों बाद भी इतिहास में अमर है। भारत के इतिहास में विलय दिवस की गाथा ने विशेष स्थान बनाया है। इस अहम दिन को याद रखते हुए हर साल 26 अक्तूबर को विलय दिवस मनाया जाता है। राजनेताओं और इतिहासकारों के अनुसार विलय दिवस की बदौलत जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारतीय नागरिक होने का गौरव हासिल हुआ है।इतिहासकारों के अनुसार 24 अक्तूबर, 1947 को कबाइलियों ने रियासत पर ताबड़तोड़ हमले किए थे। यह सूचना मिलते ही ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह अपनी सेना की टुकड़ी के साथ कश्मीर की उड़ी सीमा पर पहुंचे। तब तक कबाइली गिलगित और बाल्टिस्तान सहित कई इलाकों पर कब्जा कर चुके थे। मुठभेड़ के दौरान कबाइलियों को सेना ने खदेड़ा, लेकिन मुजफराबाद क्षेत्र को पूरी तरह से कबाइली घेर चुके थे। वर्तमान में इस क्षेत्र को पाकिस्तान अनाधिकृत क्षेत्र कहा जाता है। मुठभेड़ के दौरान सेना के कई जवान शहीद हुए थे, लेकिन ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने हार नहीं मानी और गोली लगने के बाद भी भूखे-प्यासे दुश्मनों का सामना करते रहे। तीसरे दिन उन्होंने दम तोड़ दिया था।

रियासत को बचाने के लिए महाराजा ने मांगी थी मदद
जम्मू-कश्मीर रियासत को कबाइलियों से बचाने के लिए महारजा हरि सिंह ने केंद्र सरकार की मदद मांगी थी। तब की सरकार ने महाराजा के साथ विलय करने की शर्त रखी। 26 अक्तूबर, 1947 को विलय होते ही भारतीय सेना ने घाटी के सीमांत क्षेत्रों में पहुंचकर बिगड़ी स्थिति पर काबू पाया था। तब से जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंक बना है।