संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
चनपटिया के जबदौल गांव के एक साधारण परिवार में 1963 में जन्मे कॉमर्स के ख्यातिलब्ध प्राध्यापक गुरुवर पद्मनाथ दुबे ने अब से 32 साल पहले 1990 में नगर के किला मुहल्ला में कोचिंग की शुरूआत की थी। इसी शुरुआत के साथ पुरे जिले में कामयाबी का किला बनाने स्वर्गीय पद्मनाथ दुबे जी ने तीन पीढ़ियों को शिक्षा दान का अनूठा मिशाल बनाया है।अपनी तीनों संतानों यथा-पुत्र-रहान गौतम व पुत्री स्वेता प्रियदर्शिनी को सीए तथा दूसरे पुत्र रोहित गौतम को एमबीए बना कामयाबी की बुलंदी पर पहुंचाने वाले दुबे सर का इतिहास अनुकरणीय है। सेवाभाव से सम्पूर्ण समाज में ज्ञान की ज्योति जलाते रहे स्वर्गीय दुबे सर का निधन कल दिल्ली अपोलो अस्पताल में लंबे समय से जारी इलाज के दौरान हो जाना सचमुच हृदय विदारक है।

नगर के किला मुहल्ला में संचालिय कोचिंग से अपने हजारों विद्यार्थियों को सफलता के शिखर पर पहुंचाने वाले दुबे सर को शतत श्रद्धांजलि देते हुये मैं कहना चाहूंगी कि– “अपनी यादों का देके नजराना वो जाने वाले आजीब होते हैं,
वो बड़े खुश नसीब होते हैं जिनके मरने पे सारे लोग रोते हैं।”